गुजरात के पाटीदारों ने 4500 गांवों में लगाये पोस्टर- ‘भाजपा के लिए धारा 144 है,गाँव में घुसना भी मना है’!

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आज हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी गुजरात से आते हैं और जबकि उसी गुजरात से ही वह 3 बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तथा पहले यहाँ पर मोदी जी का दबदबा होता था, पर आज उसी गुजरात के गांव-घर में स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने बीजेपी के लोगों को गांव के अंदर प्रवेश करने तक पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

गुजरात : प्रदेश के पिछले चुनावों में जो पटेल समुदाय भाजपा का प्रबल समर्थक रहा, आज उसने ही इस बार ‘भाजपा हराओ’ का नारा बुलंद किया है। राज्य के पटेल बहुल 4,500 से अधिक गांव के प्रवेश द्वार पर आन्दोलनकारी पटेल युवाओं ने ‘भाजपा के लिए 144 धारा लागू है’ के बैनर लगा रखे हैं, यानि इन गाँव में भाजपा के प्रवेश पर प्रतिबन्ध है। बीजेपी के लिए गुजरात चुनाव में पटेल समुदाय समस्या खड़ा कर चुका है।

पटेल समुदाय का नेतृत्व करने वाले हार्दिक पटेल हर रोज बीजेपी पर जमकर निशाना साध रहे हैं। गुजरात की कुल आबादी 6 करोड़ 27 लाख है। इसमें पटेल-पाटीदार लोगों की तादाद 14 प्रतिशत है।

हार्दिक पटेल खुले मंचों से गुजरात चुनाव में कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं। गुजरात चुनाव में पटेल समुदाय गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।

2012 में पटेलों दिया था बीजेपी को समर्थन –

गुजरात में पटेलों में दो उप-समुदाय हैं। इनमें एक लेउवा पटेल और दूसरा कड़वा पटेल। हार्दिक पटेल, कड़वा पटेल समुदाय से हैं। केशुभाई पटेल लेउवा समुदाय से हैं। 1990 के दशक से ही दो-तिहाई से ज्यादा पटेल, बीजेपी के पक्ष में वोट करते आए हैं।
पाटीदार समुदाय में लेउवा का हिस्सा 60 फीसदी और कड़वा का हिस्सा 40 फीसदी है। कांग्रेस को कड़वा के मुकाबले लेउवा से ज्यादा समर्थन मिलता रहा है। पाटीदार समुदाय संगठित होकर मतदान करता है। पिछले चुनाव 2012 के आंकड़े को देखें तो लेउवा पटेल के 63 फीसदी और कड़वा पटेल के 82 फीसदी वोट बीजेपी को मिले थे।

क्या है पटेलों की मांग ?

पटेल-पाटीदार समुदाय खुद को 146वीं कम्युनिटी के रूप में ओबीसी की लिस्ट में शामिल कराना चाहती है, ताकि शिक्षा और नौकरी में उन्हें आरक्षण मिल सके। हालाँकि यह मांग कांग्रेस के लिए भी एक चुनौती है क्योंकि हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए पिछड़े वर्ग के नेता अल्पेश ठाकोर लगातार पाटीदारों को OBC कोटे में से आरक्षण देने के विरोध में रहे हैं और यही उनकी राजनीति की मुख्या आधार रहा है।

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