PM मोदी की खुली पोल- UP के डिप्टी CM केशव मौर्या के ससुराल में 70 साल से बिजली नहीं, अंधेरा कायम !

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लखनऊ : देश में विकास के बड़े-बड़े भाषण देने वाले प्रधानमंत्री मोदी के खोखले वादे और कोरे भाषणों का एक जीता जागता उदहारण ये है कि यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और यूपी के मौजूदा उपमुख्यमंत्री वा सांसद केशव प्रसाद मौर्य के लोक सभा क्षेत्र और गृह जनपद कौशांबी के खूझा गांव में उनकी ससुराल में आज तक बिजली नहीं पहुँचा पाए हैं तथा इस गांव की बदहाल स्थिति केशव मौर्या के साथ मोदी जी के विकास कार्यों की पोल खोल रही है।

इस गांव में आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी अंधेरा ही अंधेरा है। केंद्र की मोदी सरकार ने भले की पंडित दीनदयाल ग्रामीण ज्योति योजना के तहत गांव-गांव बिजली पहुंचाने का ऐलान किया हो, लेकिन इसे केशव मौर्य के ससुरालियों की बदनसीबी कहेंगे कि विद्युत विभाग की तरफ से विद्युतीकरण की लिस्ट में भी खूझा गांव का नाम नहीं है या इस गांव के दामाद ने कभी चाहा ही नहीं कि यहाँ बिजली आये !

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और यूपी के मौजूदा उपमुख्यमंत्री वा सांसद केशव प्रसाद मौर्य के ससुराल वालों का दर्द !

दामाद हमारा BJP जैसी बड़ी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष, सांसद और डिप्टी सीएम है, फिर भी हमारे घर में पिछले 70 वर्षों से अंधेरा है … यह दर्द है उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के ससुराल वालों का, जो आज भी अंधेरे में गुजारा कर रहा है। सुनकर आपको अचरज जरूर हुआ होगा,पर सच मायने में पूरे देश के अंदर इसी तरह के खोखले भाषणों और कोरे वादों का मायाजाल दिखाया गया है जनता को … ?

यहां अंधेरा क्यों पसरा है,क्या आप ये जानना नहीं चाहेंगे ?

सिराथू, जहां से केशव प्रसाद मौर्य विधायक भी रह चुके हैं, वहां से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर खूझा गांव है, जहाँ पर केशव प्रसाद मौर्या की ससुराल है और आज भी उनके ससुराल पक्ष के बहुत से लोग वहीँ रहते हैं। 300 सौ से अधिक आवादी वाले इस गांव में आजादी के बाद से अब तक लोगों को बिजली नहीं नसीब हुई। खूझा गांव के लोगों में तब बड़ी उम्मीदें जागी थी, जब इस गांव का दामाद केशव मौर्य पहली बार इसी क्षेत्र से विधायक बने थे पर कुछ हुआ नहीं, एक बार उम्मीदें फिर से जागी थी जब केशव मौर्य पहली बार इसी क्षेत्र से पहली बार सांसद बने थे और उनकी पार्टी भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार देश में बनी और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने पर फिर भी कुछ नहीं हुआ, वहीँ भाजपा ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया तब भी कुछ नहीं हुआ! अबकी बार केशव मौर्या यूपी के डिप्टी सीएम बने है, क्या अबकी बार उनके गांव में बिजली के साथ-साथ विकास की कोई बयार बहेगी या पहले की तरह अबकी बार भी खूझा गांव के लोगों के हाथ निराशा ही लगेगी, वैसे उनकी यह उम्मीदें अब तक महज एक सपना ही साबित हो रही हैं।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सास राम दुलारी ने भी इस बात को माना कि उनके दामाद उप मुख्यमंत्री हैं और उनके गांव में बिजली नहीं है। वहीं इस मामले अधिकारीयों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि खूझा गांव में बिजली नहीं है।

PM मोदी के मन की बात पर – बदहाली से जूझ रहे अपने ससुराल को गोद लेकर क्यों नहीं खिलाया सांसद केशव मौर्या ने !

बिजली ही नहीं आधुनिक युग मे बदहाली का दंश झेल रहा खूझा गांव के लोग शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत पीछे हैं। गांव के बच्चे ढ़िबरी के सहारे पढ़ाई लिखाई तो जरूर करते है, पर उनके भविष्य पर बिजली की कमी कुंडली मार कर बैठी है।

विकास की राह में कोसो दूर खड़ा खूझा गांव के लोगों के लिए बिजली की कमी कितना सताती है इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। भीषण गर्मी में लोगों का बुरा हाल है। दहेज में मिला टीवी, फ़्रिज, कूलर आदि आधुनिक समान कूड़े की तरह एक कोने में पड़े हैं।

गांव के लोग बताते है कि खूझा गांव में बहन बेटियों की शादी भी बामुश्किल हो पाती है। गांव में जिन लोगों की आर्थिक स्तिथी ठीक है, वो तो गेस्ट हाउस से शादी विवाह कर लेते है लेकिन जो गरीब तबके के लोग है उनके बहन बेटियों की डोली आज भी पेट्रोमैक्स यानी कि गैस की रोशनी में उठती है।पेट्रोमैक्स के अलावा अगर इस गांव में बिजली का कोई साधन है तो वो है एकाध सोलर पैनल। जिसके सहारे शाम को रोशनी हो जाती होगी।