नोटबंदी से बेमौत मारा गया किसान, आलू के दाम 1 रूपये हुए तो सड़क पर फेंके सैकड़ों किलो आलू

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इंदौर, 8 नवम्बर से लागू की गयी नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर अगर किसी पर पड़ा है तो वो देश के किसानों पर पाया है। नोटबंदी के चलते किसानों की फसलें चौपट हो गयी वो बुआई नहीं कर पाये। सबसे ज्यादा वो किसान परेशान हुआ जिसकी फसल तैयार खड़ी थी और जिसने कोल्डस्टोरेज में अपना आलू रख रखा था।

किसान आलू को कोल्डस्टोरेज में इसलिए रखता है कि जब बुआई का सीजन आयेगा तो वो आलू बेचकर थोड़ा मुनाफ़ा कमायेगा। इसबार हालात तो ऐसे हो गए हैं की मुनाफा तो दूर की बात है उसे कोल्डस्टोरेज से बाजार तक ले जाने का किराया निकल जाए वही बहुत है।

भाव बढ़ने की आस में कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू के भाव भाड़े से कम हो गए हैं, जिससे किसान की लागत भी नहीं निकल रही है। ऐसे में परेशान आलू उत्पादक किसानों सैकड़ों किलो आलू सड़क पर फेंक दिए।

किसानों के विरोध की ये घटना भाप शासित मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की हैं। यहां शहर के इंदौर के आस-पास के किसान विधायक जीतू पटवारी के साथ विरोध प्रदर्शन करने के लिए राजवाड़े पर गरीबों को मुफ्त में आलू बांटने जा रहे थे।

आलू के दाम किसानों को खून के आंसू रुला रहे हैं। ऐसे ही किसान आलू की गिरती कीमतों के विरोध में प्रदर्शन करने जा रहे थे, जिन्हें पुलिस और प्रशासन ने रास्ते में रोक दिया। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने माणिकबाग रोड पर रोका, तो किसानों ने वहीं सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्य मार्ग पर सैकड़ों किलों आलू फेंक दिया।

ये सभी किसान आलू की खेती के कारण बड़ा नुकसान झेल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कांग्रेसी विधायक जीतू पटवारी का कहना है कि, आलू की कीमत एक रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। इस वजह से किसानों का कोल्ड स्टोरेज का किराया भी नहीं निकल रहा है।

प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा, “नोटबंदी की वजह से थोक बाजार में इसके भाव इस कदर गिर गये हैं कि हमें खेती का लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। इस बार की आलू किसानों को रुला रही है।”

इंदौर में करीब छह महीने पहले किसानों ने दाम गिरने पर इसी तरह सड़क पर प्याज फेंककर अपना विरोध दर्ज कराया था।

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