PM मोदी के अनाड़ीपन ने देश की आर्थिक जड़ों को खोखला किया, नोटबंदी के सारे उद्देश्य पूरी तरह फेल ! पढ़े रिपोर्ट

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दिल्ली : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी जैसे सबसे बड़े फैसले की असलियत अब सरकार के सामने भी आने लगे है, नोटबंदी के 1.5 साल बाद भी उसके सारे उद्देश्य अब तक पूरी तरह फेल ही साबित हुए हैं । पीएम मोदी ने देश में नोटबंदी लागू करते वक़्त भाषण देते हुए कहा था कि नोटबंदी से कालेधन खत्म हो जाएगा, आतंकवाद खत्म हो जायेगा, नक्सलवाद खत्म हो जाएगा, नकली नोट बंद हो जायेगा, भ्रष्टाचार खत्म हो जायेगा और भारत विकसित देशों की तरह कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर कदम बढ़ाएगा।

कालाधन वाले उद्देश्य की हवा तो उसी वक्त निकल गई थी, जब आरबीआई ने 99 फीसदी नोटों के सिस्टम में वापस आने की पुष्टि की थी। वहीं हालिया जानकारी से यह भी साबित हो गया कि नोटबंदी का एक और उद्देश्य भी फेल हो गया है।

बता दें कि आरबीआई के अनुसार देश की जनता के हाथ में इस समय 18.5 लाख करोड़ की नकदी है जबकि नोटबंदी से पहले 5 जनवरी 2016 को यह राशि 17 लाख करोड़ रुपये थी। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। नोटबंदी के दौर की बात करें तो उस दौरान जनता के हाथ में नकदी सिमट कर करीब 7.8 लाख करोड़ रुपये रह गई थी।

आरबीआई के मुताबिक, 1 जून 2018 को 19.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मुद्रा चलन में थी। यह एक वर्ष के पहले की तुलना में 30 फीसदी अधिक है और छह जनवरी 2017 के 8.9 लाख करोड़ रुपये की तुलना में दोगुने से अधिक है। वहीं मई 2018 तक लोगों के हाथ में 18.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मुद्रा थी, जो कि एक वर्ष पहले की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। यह 9 दिसंबर 2016 के आंकड़े 7.8 लाख करोड़ रुपये के दोगुने से अधिक है।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मई 2014 में मोदी सरकार के आने से पहले लोगों के पास लगभग 13 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा थी। एक वर्ष में यह बढ़कर 14.5 लाख करोड़ से अधिक और मई 2016 में यह 16.7 लाख करोड़ हो गई।

आरबीआई के मुताबिक, कुल 15.44 लाख करोड़ रुपये की अमान्य मुद्रा में से 30 जून 2017 तक लोगों ने 15.28 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा बैंकों में जमा करवाई।

यह है लोगों के हाथ में पड़ी मुद्रा का मतलब –

चलन में मौजूद कुल मुद्रा में से बैंकों के पास पड़ी नकदी को घटा देने पर पता चलता है कि चलन में कितनी मुद्रा लोगों के हाथ में पड़ी है। भारतीय रिजर्व बैंक चलन में मुद्रा के आंकड़े साप्ताहिक आधार पर और जनता के पास मौजूद मुद्रा के आंकड़े 15 दिन में प्रकाशित करता है।

नोटबंदी से आतंकवाद, नक्सलवाद, नकली नोट और भ्रष्टाचार पर नहीं पड़ा जरा भी असर !

पीएम मोदी के वो सारे दावे पूरी तरह फेल साबित हुए हैं, जो उन्होंने देश में नोटबंदी लागू करते वक़्त करे थे। आज नोटबंदी के 1.5 साल बाद भी आतंकवाद में कोई कमी नहीं आयी है, बल्कि सरहद पर आतंकी घटनाएं और अधिक बढ़ गयीं हैं। वहीँ नक्सलवादी घटनाओं में कोई कमी नहीं आयी है, इस साल सैकङों जवान नक्सलवादियों के हाथों अपनी जवान गँवा चुके हैं। जबकि अब प्रधानमंत्री मोदी को भी नक्सलवाद से जान का खतरा हो गया है।

देश में नकली नोट का तो अब ये हाल है कि बॉर्डर पार की बात छोड़िये, हमारे गाँव के लड़के बहुत ही शानदार नकली नोट बनाने लग गए हैं। अभी हाल ही में कानपूर देहात में एक ग्रामीण 40 लाख की नकली करेंसी के नोटों के साथ पकड़ा गया था, वो पुलिस चौकी के सामने ही एक घर में रहकर नकली नोटों को प्रिंटर की मदद से छापता था, पकडे जाने पर उसने बताया कि अब तक 40 लाख रूपये वह मार्केट में खपा भी चूका है।

देश में भ्रष्टाचार कहाँ काम हुआ है, इसकी सच्चाई आपको हर सरकारी ऑफिस में जाने पर मिल ही जायेगी। अभी हाल ही में यूपी के मुख्यमंत्री योगी के प्रिंसिपल सेक्रटरी ने एक युवक से पेट्रोल पंप लगाने की परमिशन देने के लिए 25 लाख रूपये की रिश्वत मांगी थी। पीएम मोदी ने नोटबंदी के अपने फैसले से पूरे देश को तो परेशान किया ही, साथ ही साथ करोड़ों लोगों का रोजगार भी छीन लिया क्योंकि नोटबंदी के कारण लाखों छोटे-छोटे उद्योगों के बंद होने से लोग बेरोजगार हो गए।

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