मुलायम सिंह के घर इटावा में BJP का सूपड़ा साफ होने से ‘संघ’ नाराज, सपा के निर्दलीयों ने मारी बाजी!

0
12

 

इटावा : सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गढ़ में भाजपा के खाता न खोल पाने से संघ के नेता बहुत अधिक नाराज दिख रहे है, इसीलिए संघ ने भाजपा की हार के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्यवाही करने का मन बनाया है तथा इटावा जिले के कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अगले सप्ताह होने वाली समीक्षा बैठक में भितरघातियों की रिपोर्ट तैयार होगी। ऐसे लोगों को आगामी लोकसभा चुनाव से दूर रखा जा सकता है। साथ ही भविष्य में होेने वाले चुनाव में भी उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है।

सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के गढ़ इटावा में 2014 के लोक सभा चुनाव में भाजपा को सफलता मिली थी तथा इसके बाद विधानसभा चुनाव में भी दो विधायक मिले। मुलायम सिंह के गढ़ में इस अभूतपूर्व सफलता को देखकर संघ की बाछें खिल गईं थी । जिसके चलते इटावा में पहली बार संघ का पथ संचलन हुआ तथा आसपास के जिलों का सात दिवसीय शिविर भी यहां लगा। सूत्रों की मानें तो संघ का टारगेट था कि नगर निकाय चुनाव में जिले की तीन नगर पालिका और तीन नगर पंचायतों में कम से कम दो-दो सीटों पर भगवाध्वज फहराएंगे।

मुलायम के गढ़ इटावा में भाजपा का खाता तक नहीं खुला,संघ और भाजपा को लगा बड़ा झटका !

बता दें कि भाजपा में टिकट बंटवारा भी इसी रणनीति के तहत किया गया था । इतना ही नहीं पड़ोसी जिले के कुछ प्रचारक भी इटावा में उतारे गए थे, लेकिन शुक्रवार को घोषित चुनाव परिणाम में भाजपा खाता तक नहीं खोल सकी। वहीं केंद्र और प्रदेश में अपनी सत्ता की हनक दिखाने वाले भाजपाइयों की निकाय चुनावों में लुटिया ही डूब गई। सबसे आश्चर्यजनक बात ये रही कि इटावा को छोड़ बाकी पांच निकायों में तो भाजपा को दूसरा नंबर भी नसीब नहीं हुआ। वहीँ दो नगर पालिका पर सपा का कब्जा बरकरार रहा तो एक पर निर्दल विजयी हुआ। इसी तरह नगर पंचायत में तीनोें निर्दल को सफलता मिली। हालाँकि ये सभी निर्दलीय मूलरूप से सपा के ही हैं, जो सपा से टिकट ना मिलने की वजह से निर्दलीय ही मैदान में उतरे थे और अब जीत कर संगठन की नजर में अपना कद ऊँचा कर चुके हैं ।

निकाय चुनाव में फेल होने पर संघ ने सख्ती शुरू कर दी है !

जिले में भाजपा का एक सांसद, दो विधायक हैं। संगठनात्मक ढांचा मजबूत होने का दावा किया जाता रहा, लेकिन निकाय चुनाव का नतीजा फेल रहने से संघ ने सख्ती शुरू कर दी है। इसका खामियाजा आगामी चुनावी समर में उतरने वालों को भी भुगतना पड़ सकता है। संघ का मानना था कि इटावा में बाजी मार लेते तो इसका संदेश पूरे प्रदेश में जाता, लेकिन इस मकसद में कामयाबी नहीं मिली।

भाजपा संगठन और संघ के साथ कुछ वरिष्ठ नेता भी चुनाव से दूरी क्यों बनाए रहे !

शनिवार को संघ के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच मंत्रणा हुआ। माना गया कि संगठन के साथ ही कुछ अन्य वरिष्ठ नेता भी चुनाव से दूरी बनाए रखे। टिकट वितरण से शुरू हुआ असंतोष अंतिम समय तक बना रहा। ऐसे में मतों की एकजुटता नहीं हो पाई। अब ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए अगले सप्ताह की बैठक में रणनीति तय की जाएगी। भाजपा जिलाध्यक्ष महेश दुबे का कहना है कि निकाय चुनाव परिणाम की समीक्षा की जाएगा।

भाजपा की समन्वय समिति हुई फेल !

प्रदेश में सरकार बनने के बाद संगठन एवं सरकार में तालमेल बना रहे, इसके लिए समन्वय समिति बनाई गई है। जिले के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। सरकार बनने के आठ महीने बीतने को है। जिले के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह वैसे तो महीने में दो-दो बार बैठक करने आते थे। उनका दौरा प्रशासनिक अधिकारियों की बैठकों एवं सरकारी कार्यक्रमों तक ही सीमित रहता था। आम कार्यकर्ताओं एवं आम मतदाताओं से उन्हें मिलने की फुरसत नहीं रहती थी। कार्यकर्ता संगठन और सरकार में पूरी तरह से उपेक्षित हो गया। मतदाताओं का भी धीरे-धीरे भाजपा से मोहभंग हो गया। नतीजा एक सांसद एवं दो विधायक वाली भाजपा निकाय चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी। भाजपा की अब तक की यह सबसे शर्मनाक हार है।

Loading...