सहारनपुर दंगा : क्या यूपी के कथित रामराज्य में फिर से पनपने लगे हैं दलितों और पिछड़ों के दुश्मन ?

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सहारनपुर, यूपी के जलते हुये शहर सहारनपुर में करीब डेढ़ माह से चल रहे जातीय संघर्ष को देखकर ऐसा लगने लगा है कि जैसे ‘दलित’ और पिछड़ों के नाम और उनके समाज के होते विकास से समाज में सवर्ण लोगों की नफरत, योगी के रामराज्य के आते ही बहुत अधिक हो गई है। ऐसा कहना है उन दलितों का जिनके घर जलाए गए और जिनके घर के लोग इस हिंसा में मरे हैं या गंभीर घायल हैं।

लगातार हो रही घटनाओं को देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे यूपी में दलितों के साथ अन्य पिछड़ी जातियों के दुश्मन तथाकथित रामराज्य में फिर से पनपने लगे हैं। वहीं सहारनपुर में दलितों से लगातार होती हिंसा और सरकार के दबाव में निर्दोष दलित युवाओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने के विरोध में दलित समाज की महिलाओं ने डीएम कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि झूठे मुकदमों में जेल भेजकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है,क्या सरकार हमारे बच्चों को जानबूझकर अपराधी बनाना चाहता है ?

नारेबाजी करते हुए डीएम कार्यालय पहुंचे दलित समाज के लोग !

मंगलवार को दलित समाज की महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में नारेबाजी करते हुए डीएम कार्यालय पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने धरना प्रदर्शन किया और सिटी मजिस्ट्रेट हरिशंकर को ज्ञापन सौंपा। लोगों ने कहा कि पुलिस ने निर्दोष दलित युवाओं पर गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि शब्बीरपुर के दोषियों ठाकुर समुदाय के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। झूठे मुकदमों में जेल भेजे जाने से हमारे बच्चों का भविष्य खराब हो गया है।

सहारनपुर-दलित महिला का कटा हाथ! क्या ये भी अखिलेश का गुण्ड़ाराज है या मोदी-योगी के गुण्ड़ों का रामराज्य?

उन्होंने भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद पर लगाए गए आरोपों को वापस लेने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कमल सिंह वालिया को राजनीतिक लोगों के दबाव में जॉब से हटा दिया है, जिसकी तुरंत बहाली होनी चाहिए। दलित समाज का शोषण बंद नहीं हुआ और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो दलित समाज धर्म परिवर्तन करने को बाध्य हो जाएगा। दलित समाज की महिलाएं एकजुट होकर अत्याचार और शोषण के खिलाफ आंदोलन करेंगी।