अखिलेश के नेता का काम बोल रहा है – यूपी सरकार ने माना लोहा इस समाजवादी नेता को किया सम्मानित

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लखनऊ, कहते है कि जो काम करता है उसका काम छिपता नहीं है सबके सामने आ ही जाता है। जब बीजेपी सत्ता में नहीं थी तब बीजेपी के नेताओं ने और वर्तमान में डिप्टी सीएम और सीएम साहब ने अखिलेश यादव की सरकार को खूब कोसा और आज उसी अखिलेश सरकार के काम के चलते समाजवादी पार्टी के नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष को सम्मानित किया।

सोनभद्र के जिलापंचायत अध्यक्ष अनिल यादव को योगी सरकार द्वारा सम्मानित किया गया वजह विकास के कार्य है। सोनभद्र के बेहद दूरगामी अंचल अगोरी के रहने वाले अनिल यादव जो जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। यह वो इलाका है जहाँ का अब से महज दो तीन वर्ष पूर्व तक बरसात के दौरान शेष जिले से संपर्क टूट जाता था। अनिल जब छात्र थे तो उन्हें उनके सहपाठियों ने उनके डिग्री कालेज में छात्र संघ का अध्यक्ष बना दिया। जब कालेज से निकले तो उन्होंने अपना पूरा समय समाजवादी पार्टी को देना शुरू कर दिया।

जब पिछले दिनों जिला पंचायत चुनाव हुए तो गाँव वालों की जिद्द पर अनिल यादव पंचायत सदस्य हो गये फिर अखिलेश यादव ने उनकी ईमानदारी कर्मठता को मान देते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष बना दिया। यह अनिल यादव आज लखनऊ में दीनदयाल उपाध्याय पंचायत प्रशस्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित हुए हैं, सोनभद्र जिला पंचायत प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ जिला पंचायत घोषित हुई है।

पुरस्कार मिलने पर ख़ुशी जाहिर करते हुए अनिल यादव कहते हैं अभी हमें और काम करना है सोनभद्र के आदिवासी गिरिजनों की मुश्किलें थोड़ी सी भी कम कर पाया तो मुझे अच्छा लगेगा। अनिल यादव द्वारा अपनी पंचायत को श्रेष्ठ बनाने के लिए किये जाने वाले प्रयासों की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। अनिल ने जब पद संभाला तो केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाली तमाम फंडिंग लगभग बंद हो चुकी थी उनके पास जिला निधि और राज्य सरकार की थोड़ी बहुत राशि ही विकास कार्यों के लिए उपलब्ध थी।

उन्होंने पंचायत अध्यक्ष के तौर पर पहला काम आम आदिवासी और ग्रामीण जनता के लिए सुगम और छोटी सड़कों के निर्माण का शुरू किया ,जिससे कि उनकी शहरी इलाकों में पहुँच आसान हो सके ।अनिल कहते हैं कि हमारे यहाँ स्वास्थय ,शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को जन जन तक पहुंचाने के काम में सबसे ज्यादा आड़े पहुँच मार्ग की अनुपलब्धता आ रही थी ,गाँवों तक न तो एम्बुलेस पहुँच सकती थी न पुलिस, न ही छात्र पढने जा पाते थे।

अनिल कहते हैं कि दूसरी बड़ी जरुरत फंड की कमी थी। हमने देखा कि पंचायत को टैक्स वसूलने के अधिकार तो है लेकिन कही भी सही तरीके से और ईमानदारी से न तो वसूली हो रही है न ही नियमों का पालन हो रहा है हमने टैक्स वसूली को नियमित किया ,जिससे हमारी पंचायत की आया में वृद्धि हुई और विकास कार्य ज्यादा तेजी से कराये जाने लगे। अनिल कहते हैं आदिवासियों की शिक्षा और स्वास्थ्य गंभीर मुद्दा है अब हम इसी पर काम करने जा रहे हैं जल्द ही आपको हकीकत जमीन पर सुधार दिखने लगेगा ।

Input Patrika

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