मोदी सरकार में खून के आंसू रोने वाले व आत्महत्या को मजबूर किसानों ने किया ‘गांव बंद’, देश में दूध-सब्जी की किल्लत !

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नई दिल्ली : देश में पिछले 4 सालों से भाजपा की मोदी सरकार सत्ता में है, इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को कोई राहत ना देते हुए उनके आक्रोश को भड़का दिया है। किसानों की कर्ज माफ़ी की मांग को भी मोदी सरकार ने यह कहकर ठुकरा दिया कि केंद्र सरकार ऐसी कोई भी मदद नहीं कर सकती, वहीँ किसानों को उनकी फसल को उचित मूल्य ना मिलना भी इस आक्रोश का एक मुख्या कारण है। देश भर के किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर 10 दिन के लिए ‘गांव बंद’ का आयोजन किया है, इसी कड़ी में आज सात राज्यों के लाखों किसानों के ‘गांव बंद’ का आज दूसरा दिन है। गौरतलब है कि पिछले 4 सालों में 10 हजार से अधिक किसानों ने तंगहाली के चलते आत्महत्या कर ली है, यह संख्या भाजपा शासित राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र,यूपी,राजस्थान राज्यों में सर्वाधिक है। इस बंद का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश में ही बताया जा रहा है, जहाँ पिछले साल मंदसौर में किसानों के प्रदर्शन में शिवराज सरकार ने गोली चलवा दी थी जिसमे 6 किसानों की मौत हो गयी थी। मंदसौर के उसी नरसंघार की बरसी भी है।

आज शहरों में सप्लाई होने वाले दूध फल सब्ज़ी की सप्लाई आज से प्रभावित होनी शुरु होने लगी है। 130 किसान संगठनों के राष्ट्रीय किसान महासंघ ने ‘गांव बंद’ घोषणा की है, देश के प्रमुख 30 हाइवे पर किसान आज धरने पर बैठेंगे, इनकी मांग है कि दूध का न्यूनतम मूल्य 27 रुपये लीटर उन्हें मिले साथ ही किसानों की क़र्ज़ माफ़ी हो और अनाज की सही कीमत उन्हें दी जाए। मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन के तहत ‘गांव बंद’ के पहले दिन शुक्रवार को छोटे शहरों में इसका व्यापक असर रहा, किसी गांव से फल, सब्जियां व दूध शहर नहीं आया, जिससे लोगों को परेशानी हुई। शहरों में मौजूद सब्जियों के दाम बढ़ गए, राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ने 10 जून को भारत बंद का ऐलान किया है। पिछले साल 6 जून को मंदसौर जिले में किसानों पर पुलिस जवानों द्वारा की गई फायरिंग और पिटाई में सात किसानों की मौत की पहली बरसी पर किसानों ने 10 दिवसीय आंदोलन शुरू किया गया है।

आम किसान यूनियन के प्रमुख केदार सिरोही ने बताया, “किसान एकजुट हैं, वे अपना विरोध जारी रखे हुए हैं। ‘गांव बंद’ आंदोलन का असर साफ नजर आ रहा है। सरकार की हर संभव कोशिश है, इस आंदोलन को असफल करने की, लेकिन किसान किसी भी सूरत में सरकार के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं।” सिरोही ने आगे बताया कि बीते साल की तुलना में इस बार किसान खुद गांव से बाहर निकलकर अपना सामान बेचने जाने को तैयार नहीं है। वह सरकार की नीतियों से इतना परेशान है कि वह किसी भी तरह का आर्थिक नुकसान उठाने में नहीं हिचक रहा है, पुलिस जरूर किसानों को भड़काने व उकसाने में लगी है।

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