ऑक्सीजन बंद होने से सरकारी अस्पताल में 24 घंटे में 17 मरीजो की मौत, जिम्मेदार कौन ?

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मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार एकबार फिर घिरती नजर आ रही है अभी किसानों पर गोली चलवाने का मामला शांत भी नहीं हो पाया था कि इंदौर के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते एक बड़ा हादसा हो गया।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक इंदौर शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव हॉस्पिटल में पिछले 24 घंटे के भीतर 17 मरीजों की मौत हो चुकी है। मरीजों के परिजनों ने बताया कि सुबह लगभग 4 बजे ऑक्सीजन के आपूर्ति अचानक बंद हो गई जिसकी वजह से मरीज तड़पने लगे और जिसके बाद एक के बाद एक मरीज मौत की गहरी नींद में सो गया।

इनमें से 11 मौतें 12 घंटों के भीतर हुईं। सात मरीजो ने गुरुवार सुबह 4 से 4:30 बजे के बीच सिर्फ आधे घंटे में दम तोड़ दिया। इनमें से छह वेंटिलेटर पर थे। पांच मरीज पांचवीं मंजिल पर मेडिसिन आईसीयू में भर्ती थे, जबकि एक मरीज सर्जिकल आईसीयू और एक प्री-मेच्योर बच्चा सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में भर्ती था।

मौतों को लेकर अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि सूत्रों की मानें तो रात तीन से चार बजे के बीच ऑक्सीजन सप्लाई 15 मिनट के लिए बंद हुई थी। इसी दौरान इन 7 मरीजों की मौत हुई। लापरवाही के चलते इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद अस्पताल प्रशासन मामले की लीपापोती करने में लगा है। हॉस्पिटल प्रशासन और कमिश्नर ने इन्हें सामान्य मौत बता रहे है। उनका कहना है कि सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई 350 बेड पर होती है।

सप्लाई रुकती तो बाकी मरीजों पर भी इसका असर होता। अधिकारियों का कहना है कि यहां रोज एवरेज 10-15 मौतें होती हैं। वहीं, सूत्रों के मुताबिक रोजाना एवरेज आठ से 10 मरीजों की मौत होती है। 17 मौतें एक साथ होना आम बात नहीं है।

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