1.72 लाख शिक्षामित्रों पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, अखिलेश यादव ने बनाया था सहायक शिक्षक !

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश की पूर्व अखिलेश सरकार ने 1.72 लाख शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाया था। उस समय लाखों लोगों के घर में खुशियां आई थी। मगर ये खुशी ज्यादा दिन तक नहीं रह पाई। विरोधियों को अखिलेश सरकार का फैसला पच नहीं पाया और अखिलेश सरकार के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।

12 सितंबर 2015 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सभी शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था। इसमें से 1़30 लाख शिक्षामित्र समायोजित हो चुके थे और बाकी को समायोजित करने की प्रक्रिया चल रही थी। यूपी सरकार ने इस मसले को केंद्र सरकार के साथ मिलकर सुलझाने की कोशिश भी की, लेकिन केंद्र ने भी राज्य के पाले में गेंद डाल दी थी।

इसके बाद अखिलेश सरकार ने नवंबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल पिटीशन दायर की थी। राज्य सरकार का तर्क था कि उत्‍तर प्रदेश में शिक्षकों की कमी के चलते ही शिक्षामित्रों को रखा गया था। वहीं शिक्षा का अधिकार कानून के आने के बाद इन्हें राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से अनुमति लेकर प्रशिक्षित भी किया गया।

अब उत्तर प्रदेश के 1.72 लाख शिक्षा मित्रों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहायक अध्यापक बनने के लिए शिक्षा मित्रों को टीईटी पास करना जरुरी है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा मित्रों को थोड़ी राहत देते हुए उन्होंने टीईटी पास करने के लिए दो साल का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि सरकार को दो साल में दो बार टीईटी आयोजित करनी होगी। इनमें से एक भी टेस्ट में अगर कोई पास हो जाता है तो उसकी नियुक्ति सहायक अध्यापक के पद पर हो जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शिक्षा मित्रों के लिए टीईटी के लिए उम्र में छूट दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि टेस्ट पास करने के बाद ही शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक बन पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिन 66 हजार हजार लोगों को एक टेस्ट पास करने के बाद सहायक अध्यापक के पद पर तैनाती की गई थी, उनकी नौकरी बरकरार रहेगी।

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