अखिलेश यादव के राजतिलक के बाद, अब चाचा “शिवपाल” का भी होगा सपा में भव्य राजतिलक !

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी अब फिर से अपनी पूरी ताक़त को एकजुट करके विपक्षियों पर करारा वार करने के लिए अपनी सेना में रोजाना नए प्रक्षिशित सिपाही जोड़ रही है और इसी के चलते सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मीडिया के माध्यम सबको यह साफ़ सन्देश दे दिया है कि समाजवादी पार्टी के लिए सभी के दरवाजे खुले हैं। बता दें कि अभी हाल ही में बसपा के कदावर नेता इंद्रजीत सरोज ने करीब 100 बड़े नेताओं के साथ सपा का दामन थामा है।

सूत्रों के अनुसार, नेता जी मुलायम सिंह के मध्यस्ता के बाद शिवपाल यादव के बधाई एवं आशीर्वाद वाले ट्वीट ने पिछले एक साल से रिश्तों में जमी बर्फ को पूरी तरह से पिघला दिया है और जल्द ही अब सपा परिवार में जारी गतिरोध भी ख़तम हो जाएगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर अखिलेश यादव की दोबारा ताजपोशी के बाद अब उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव की भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिमेदारी के पद के साथ भव्य ताजपोशी की चर्चा राजनीतिक गलियारों में तेज है। सैफई परिवार से सूत्रों का कहना है कि अब जल्द ही सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव अपने पिता व पार्टी संरक्षक के “एकता की ताक़त” वाले फॉर्मूले पर आगे बढ़ेंगे। माना जा रहा है कि जल्द ही शिवपाल यादव की राष्ट्रीय महासचिव के पद पर ताजपोशी हो सकती है। इसकी एक वजह यह भी है कि गुरुवार को आगरा में संपन्न हुए पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश के अध्यक्ष बनने के बाद शिवपाल ने अपने ट्वीटर अकाउंट पर ट्वीट कर अखिलेश यादव को सपा अध्यक्ष बनने की बधाई दी। साथ ही उन्होंने अखिलेश के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

बता दें कि चाचा शिवपाल सिंह यादव के बधाई वाले ट्वीट के बाद अखिलेश यादव के छोटे भाई और शिवपाल सिंह एकलौते पुत्र आदित्य यादव ने भी अपने बड़े भाई और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को बधाई सन्देश ट्वीट किया। गौरतलब है कि इस पूरे पारिवारिक विवाद को सुलझाने में आदित्य यादव की भूमिका बहुत ही सकरात्मक रही है क्योंकि इतना सब कुछ होने के बाद भी उन्होंने परिवार के किसी भी सदस्य के बारे में कुछ भी गलत नहीं बोला है।

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले से यादव परिवार में पार्टी को लेकर चला आ रहा विवाद अब शायद थमने की ओर है। इसकी वजह पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की पीड़ा है। पिछले दिनों अपनी प्रेस कॉन्फेंस में भी मुलायम ने अपनी पीड़ा को बयां किया था। उन्होंने कहा था कि बेटा अखिलेश यादव पर मेरा आशीर्वाद उसके साथ है। उन्होंने कहा था कि पार्टी के लिए अखिलेश द्वारा लिए गए सभी निर्णय गलत हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं का प्रिय नारा रहा है, ‘जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है। पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के लड़ाकू तेवरों को इस एक नारे के साथ प्रचारित करने का लंबा दौर रहा।

मालूम हो कि समाजवादी पार्टी के प्रदेश सम्मेलन के बाद मुलायम सिंह यादव ने अपनी प्रेस कॉन्फेंस में जिस प्रकार पुत्र प्रेम दिखाया और कहा कि कुछ दिनों बाद आप मुझे पार्टी अध्यक्ष के रूप में देखेंगे। इससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि सपा में कुछ तो खिचड़ी पक रही है। इसके बाद यह बात भी सामने आई की मुलायम और अखिलेश में समझौता हो गया है। इसके तहत मुलायम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व अखिलेश कार्यकारी अध्यक्ष बन सकते हैं। वहीं, शिवपाल सिंह यादव पार्टी के राष्ट्र्रीय महासचिव बन सकते हैं। इसके बाद एक बार फिर अखिलेश और मुलायम की हुई मुलाकात के बाद पासा पलटा।

सूत्र बताते हैं कि उसी समय तय हो गया था कि पार्टी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही बनेंगे और नेताजी संरक्षक ही रहेंगे। लेकिन मुलायम ने शिवपाल को पार्टी की मुख्यधारा में जोडऩे की शर्त भी रखी। और ऐसा ही हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश को दूसरी बार अध्यक्ष चुन लिया गया। अब शिवपाल को पार्टी की मुख्यधारा में जोडऩे की बात है। सूत्र बताते हैं कि जल्द ही इस पर भी अखिलेश मुहर लगा देंगे।

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