भाजपा को लगा बड़ा झटका, कानपुर के दिग्गज विधायक की हुई मौत, देखें कौन हैं ये विधायक !

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कानपुर देहात, जिले की राजनीति का जाना माना चेहरा और भाजपा विधायक मथुरा पाल का शनिवार सुबह देहांत हो गया। मथुरा पाल लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थे। मथुरा पाल के निधन की सूचना आते ही पुरे क्षेत्र में गम का माहौल छा गया। निधन की सूचना पाते ही उनके आवास पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। बताया जा रहा है कि भाजपा विधायक मथुरा पाल के निधन की जानकारी लगते ही उनके पैतृक गांव के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निकल गए हैं।

मथुरा प्रसाद पाल व्हील चेयर पर 17 जुलाई को लखनऊ में विधान भवन में राष्ट्रपति के चुनाव में मतदान करने पहुंचे थे। इसके बाद वापस कानपुर लौट गए थे।

बता दें कि शुक्रवार रात मथुरा पाल की तबीयत अचानक खराब होने पर उनके पुत्र महिपाल सिंह व अन्य परिजन उन्हे लेकर मेदांता हॉस्पिटल दिल्ली जा रहे थे, लेकिन मथुरा के समीप पहुंचने पर उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे जिले मे शोक की लहर दौड़ गई। इसके बाद प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना व साध्वी निरंजन ज्योति, विधायक प्रतिभा शुक्ला, जिलाध्यक्ष राहुलदेव अग्निहोत्री सहित अन्य राजनीतिक दलों के लोग उनके पैतृक गांव पंचन पुरवा मैदू पहुंच गए। राजनीतिज्ञों ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुये उनके परिवारीजनों को ढांढस बंधाया।

मथुरा पाल लम्बे अरसे से कैंसर की बीमारी से ग्रसित थे। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी वह बीमारी के चलते चुनावी दौरा नहीं कर सके थे लेकिन मोदी लहार ने उन्हें भारी मतों से विजयी बनाया था। शनिवार दोपहर करीब 4 बजे उनका शव पैतृक गांव मैदू पहुंचा तो माहौल गमगीन गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर देहात के सिकंदरा से विधायक मथुरा प्रसाद पाल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। शोक संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री पाल आम जनता की समस्याओं के समाधान के प्रति बेहद संवेदनशील थे और समाज के कमजोर वर्गों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए मथुरा प्रसाद पाल के शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त की है। योगी करीब 4 बजे पहुँचे और 4.20 पर लौट गए।

मथुरा पाल की आकस्मिक मृत्यु से जिले में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। मथुरा पाल का क्षेत्र के पाल वोटों पर अच्छी पकड़ थी। मथुरा पाल अकबरपुर-रनिया विधानसभा जिसका पहले नाम सरवनखेड़ा था वहां से भी विधायक रह चुके थे। लेकिन 2002 में बसपा से चुनाव लड़े रामस्वरूप सिंह गौर ने उन्हें वहां से हराया था। जिसके बाद से वो अपनी विधानसभा से चुनाव नहीं जीत पाए। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पड़ोस की सिकंदरा सीट का रुख किया था। जहां से उन्हें 15 साल बाद जीत हासिल हुई थी।

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