सिकंदरा उपचुनाव में जमकर चली साइकिल, पंजे ने पहुंचाया कमल को तगड़ा नुकसान !

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कानपुर, कानपुर देहात की सिकंदरा विधानसभा सीट पर गुरूवार को हुई वोटिंग में 53 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। कई जगह ईवीएम मशीन में खराबी के चलते हंगामा भी हुआ। घने कोहरे के कारण मतदाता अपने अपने घरों से देरी से मतदान के लिए निकले। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं ने ज्यादा वोट भी डाले।

समाजवादी पार्टी की तरफ से सीमा सचान मैदान में थी तो भाजपा की तरफ से अजीत पाल और कांग्रेस की तरफ से प्रभाकर पांडेय मैदान में थे। बसपा ने अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था। अजीत पाल दिवंगत भाजपा विधायक मथुरा पाल के बेटे हैं।

सुबह से ही सपा की साइकिल ने रफ़्तार पकड़ी जो मतदान खत्म होने तक चलती रही। तो कांग्रेस का पंजा भाजपा के कमल के वोट काटता रहा। कांटे की टक्कर सपा और भाजपा प्रत्याशी में देखने को मिला। कुर्मी और दलित बाहुल क्षेत्र में सपा ने कुर्मी प्रत्याशी मैदान में उतारा था। जिसके चलते यहां पर सपा को तगड़ा फायदा मिलता दिखा। इस उपचुनाव में सपा की तरफ से एकमात्र महिला प्रत्याशी होने का फायदा भी मिलता दिखाई दिया। महिलाओं ने बढ़ चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। अब नतीजे आने के बाद ही पता चल पाएगा कि किसे यहां पर जीत मिल पाती है।

इस सीट के लिए एक महिला समेत 11 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस विधानसभा में 3 लाख 21 हजार वोटर हैं। इसमें 1 लाख 48 हजार 500 महिला वोटर है, 391 मतदेय स्थल और 288 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। 567 ईवीएम कंट्रोल यूनिट, 567 बैलट यूनिट लगाई गई हैं। 40 संवेदन शील बूथों पर सीसीटीवी भी लगाए गए हैं। 567 ईवीएम यूनिट लगाने के साथ साथ 567 वीवी पैट यूनिट लगाई गईं थी। जिससे लोगों में ये सुनिश्चित हो सके की, जिन्होंने वोट किया है, वो उन्हीं को जा रहा है या किसी और को।

इससे पहले भाजपा की तरफ से सीएम योगी को यहां से उम्मीदवार बनाने की मांग की गई थी। लेकिन योगी ने यहाँ से चुनाव लड़ना नहीं समझा हालांकि वो यहां पर चुनाव प्रचार करने आए इसके अलावा यहां पर योगी मंत्रिमंडल और मोदी मंत्रिमंडल के मंत्रियों ने भी चुनाव प्रचार में हिस्सा लिया। जिनमें कुर्मी नेता एवं मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, केंद्रीय मंत्री एवं बड़ा कुर्मी चेहरा अनुप्रिया पटेल भी शामिल हैं।

सपा की तरफ से भी यहां चुनावी चक्रव्यूह रचा गया विधानसभा को कई सेक्टर में बांटा गया और बड़े बड़े नेताओं को बूथ बांटे गए और उन्हें बूथ जिताने की जिम्मेदारी दी गई। अब देखना ये है की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की रणनीति कितना काम करती है। ग्राउंड रिपोर्ट से जो खबर आ रही है उसके मुताबिक सपा ने बसपा के दलित वोटरों में सेंध लगाने के साथ साथ कुर्मी वोटरों और मुस्लिम यादव वोटरों को एकबार फिर से अपने साथ लाने में कामयाबी पाई है।

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