नोटबंदी समर्थन पर “अरुण जेटली” की हुई फजीहत, 31 लाख फॉलोवर के बाद 1 घंटे में महज 1 शेयर मिला !

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दिल्ली : मोदी सरकार के तीन साल के बाद अब सरकार की लोकप्रियता में भारी गिरावट साफ़ दिखने लगी है। नोटबंदी और जीएसटी के बाद इस सरकार को लेकर लोगों की नाराज़गी बहुत ज़्यादा बढ़ी है। इसीलिए सड़क से सोशल मीडिया तक जनता सरकार को समर्थन नहीं दे रही है।
सोशल मीडिया की बात इसलिए की जा रही है, क्योंकि भाजपा खुद 2014 लोकसभा चुनाव प्रचार से लेकर आज तक सोशल मीडिया को काफी तवज्जों देती आई है। राजनीति के लिए इसका प्रयोग भी भाजपा ने ही काफी बढ़ाया है।

मोदी सरकार के सबसे विवादित कदम नोटबंदी को एक साल हो गया है। इस एक साल को लेकर कई तरह की राजनीति हो रही है। एक तरफ विपक्ष 8 नवम्बर पर काला दिवस मनाने के लिए कह रहा है। दूसरी तरफ मोदी सरकार इस तारिख पर जश्न मनाने की तैयारी में है।

वहीँ केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी अपने फेसबुक पेज पर नोटबंदी के समर्थन में ‘नोटबंदी के एक साल बाद’ नाम से एक लेख पोस्ट किया।
बता दें कि अरुण जेटली के इस पेज पर 31 लाख से ज़्यादा लोग उनको फॉलो करते हैं। उनके किसी भी पोस्ट को बढ़ी संख्या में लोग लाइक करते हैं और ज़्यादा से ज़्यादा शेयर भी करते हैं। लेकिन नोटबंदी समर्थित इस लेख को पोस्ट किये जाने के एक घंटे बाद भी सिर्फ एक ही शेयर मिला। जबकि आमतौर पर ऐसा नहीं होता है।

इससे साफ़ दिखता है कि नोटबंदी मोदी सरकार के लिए इस लोकसभा चुनाव की सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसमें कोई शक नहीं है कि मोदी सरकार के इस कदम का असर मज़दूर की नौकरी से लेकर देश की जीडीपी तक पर हुआ है। शायद इसीलिए गुजरात में भी भाजपा को जनता कड़ा विरोध झेलना पड़ रहा है।
जिस सोशल मीडिया को प्रधानमंत्री मोदी खुद इतना महत्वपूर्ण मानते हैं कि वो प्रेस कांफ्रेंस न करके ट्विटर के माध्यम से सूचनाएं देते हैं। जिस सोशल मीडिया हथियार बनाकर उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री से भारत के प्रधानमंत्री बनने का सफ़र तय किया आज वही सोशल मीडिया उनकी सरकार की हकीकत और देश की जनता में उनके प्रति नाराजगी बयान कर रहा है।

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