सपा – बसपा ने दिए संकेत 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ सकते है एक साथ, देखें ये रिपोर्ट !

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लखनऊ, 2019 के लोकसभा के चुनाव में विपक्ष का एक नया गठबन्धन देखने को मिल सकता है जिसमें समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक अहम् भूमिका निभा सकते हैं। 1993 के बाद पहली बार ऐसे समीकरण बन रहे हैं जिससे समाजवादी पार्टी और बसपा एक गठबंधन के तले आ सकते हैं। जिसकी शुरुआत शुक्रवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से बुलाई गई देशभर के विपक्षी दलों की बैठक से हो गई। यहां वर्षों बाद सपा और बसपा एक मंच पर साथ दिखे। दोनों दलों ने भविष्य के चुनावों में भी एक साथ आने का संकेत दिया है।

1993 में यूपी में मिलकर सरकार बनाने के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है जब किसी बैठक या मंच पर दोनों पार्टियों के लोग साथ-साथ दिखाई दिए। यही नहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी में साथ-साथ आने के सवाल पर दोनों पार्टियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है।

सपा महासचिव नरेश अग्रवाल ने दोनों पार्टियों के साथ-साथ लोकसभा चुनाव लड़ने के सवाल पर कहा कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। 1977 में जब इंदिरा गांधी ताकतवर हो गईं थीं और देश में आपातकाल लगाया गया था। तब भी भाजपा समेत सभी पार्टियां एकजुट हुई थीं।

ऐसा 1989 में राजीव गांधी के खिलाफ भी हुआ था। यह पहली बार नहीं हुआ है। सांप्रदायिक शक्तियों को हराने के लिए एकजुटता बहुत जरूरी है। वहीं बसपा के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने भी सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष दलों की एकजुटता पर जोर दिया।

अंबेडकर जयंती पर बसपा सुप्रीमो मायावती उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने के लिए किसी भी दल के साथ जाने की बात कह चुकी है। सोनिया की बैठक में सपा की ओर से अखिलेश यादव, रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल मौजूद थे। वहीं बसपा की ओर से मायावती और सतीश चंद्र मिश्र मौजूद थे।

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