नेताओं के आपराधिक मुकदमों पर सख्त हुआ सुप्रीम कोर्ट, इन दागियों पर चल रहे 1543 आपराधिक मामले !

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लखनऊ : यूपी में बाहुबल और राजनीति सदा से ही एक दूसरे के पूरक रहे हैं, ये कहना भी गलत नहीं होगा कि बाहुबली लोगों का देश की राजनीति में दबदबा रहा है। आज़ादी के 72 साल बाद भी हमारे देश में, अपराध की दुनिया के मशहूर लोग राजनीति में बड़ी ही आसानी से अपना करियर बना लेते हैं। सबसे बड़ी बात जो पार्टियां विपक्ष में रहते हुए गुंडाराज की बातें जोर-शोर से करती हैं, वहीँ सबसे ज्यादा दागियों को अपनी पार्टी का टिकट दे रही हैं। हालाँकि जनता भी यहाँ कम दोषी नहीं है, जो कि एक साफ़ छवि और पढ़े-लिखे नेता को चुनने की जगह अपराधियों और बाहुबलियों को अपने नेता के तौर पर चुनती है।

अपराधी नेताओं पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती !

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के आधार पर देश भर के सासंद – विधायकों पर चल रहे आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश के माननीयों पर 1543 आपराधिक मामले चल रहे हैं। एडीआर के आंकड़ों के मुताबिक़ प्रदेश के 80 सांसदों में से 25 और 403 में 189 विधयकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। अब इन मामलों में जल्द सुनवाई के लिये इलाहाबाद में एक विशेष अदालत का गठन कर दिया गया है।

ऐसे नेताओं में सबसे पहला नाम तो सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ही आता है, जिनके ऊपर कई संगीन आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं तथा उसके बाद दुसरे नंबर पर उनके ही जोड़ीदार और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का नाम आता है, जिनके ऊपर भी कई संगीन मुकदमें दर्ज हैं।

प्रदेश के कानून मंत्री बृजेश पाठक के कहा कि ये विशेष अदालत 1 मार्च से ही अपना कार्य शुरू कर देगी। यूपी की विभिन्न अदालतो में सूबे के सासंदो और विधायकों के खिलाफ चल रहे अपराधिक मुकदमों को तेजी से आगे बढाने का काम करेगी।

बृजेश पाठक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राजनेताओं के खिलाफ चल रहे अपाराधिक मुकदमो में जल्द सुनवाई के लिये यूपी सहित बिहार, आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में एक विशेष अदालत के गठन किये जाने का निर्देश दिया है। इस पर त्वरित कार्यवाई करते हुई योगी सरकार ने यूपी की विभिन्न अदालतो में सूबे के सांसद-विधयकों के खिलाफ चल रहे 1543 मुकदमों में तेजी से कार्यवाई के लिए न सिर्फ इलाहाबाद में एक एडीजी स्तर के विशेष न्यायाधीश को तेनात कर विशेष अदालत का गठन कर दिया है, बल्कि यह विशेष अदालत एक मार्च से ही अपने काम में जुट जाएगी।

अपराधियों के राजनीतिकरण से बिगड़ी देश की दिशा और दशा !

उत्तर प्रदेश में दागियों के राजनीतिकरण की शुरुआत 80 की दशक में पूर्वांचल से शुरू हुई। जानकार मानते हैं कि दागियों की मदद पॉलिटिकल पार्टियां चुनाव जिताने के लिए लेती थीं, क्योंकि उस दौर बूथ कैप्चरिंग एक आम बात थी । धन और मैन पावर अहम रोल रहता था जिसके बदले पूर्वांचल में अहम काम और भारी धनराशि से डेवलपमेंट होने लगा। इन कार्यों के ठेके बाहुबलियों को मिलने लगे। उसके बाद इन डेवलपमेंट के कामों में अपना हक़ जमाने के लिए इन बाहुबलियों ने राजनैतिक पोषक पहन ली। क्षेत्र में अच्छा दम-खम होने के चलते इनकी जीत पक्की मानी जाने लगी और राजनैतिक पार्टियों ने इन्हें शरण देना शुरू कर दिया। गोरखपुर में हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही का वो दौर इसका पुख्ता प्रमाण है। उसके बाद गाजीपुर और मऊ में मुख़्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह जैसे दागियों ने अपना वर्चस्व कायम किया, वहीँ लखीमपुर में अमर मणि त्रिपाठी तो इलाहाबाद में अतीक अहमद और रायबरेली में अखिलेश सिंह जैसे बाहुबलियों ने अपराध की दुनिया से होने के बाद राजनीति का चोला ओढ़ लिया। वैसे राजनीत में दबंगई का नाम हो और प्रतापगढ़ के राजा भैया उर्फ़ रघुराज प्रताप सिंह का नाम रह जाए ऐसा हो नहीं सकता।

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