बिहार के सवा लाख करोड़ के विशेष पैकेज से नीति आयोग अनजान ! PM मोदी की चुनावी घोषणा निकली जुमला

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पटना : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले बिहार के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के जिस स्पेशल पैकेज का एलान किया था, उसकी जानकारी तक नीति आयोग के पास नहीं है। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से हुआ है। जदयू के प्रदेश प्रवक्ताओं नीरज कुमार व राजीव रंजन प्रसाद ने गुरुवार को प्रेस कान्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी।

आपको बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली में बिहार की जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि बताओं बिहार के विकास को कितना पैसा चाहिये – ‘50,000 करोड़ चाहिए…कि 60,000 करोड़ चाहिए… कि 70,000 करोड़ चाहिए…कि 80,000 करोड़ चाहिए… मैं घोषणा करता हूं कि मैं बिहार को 1,25,000 करोड़ रुपए का स्पेशल पैकेज दूंगा!” लेकिन इस घोषणा के लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी बिहार को यह पैसा नहीं मिला और अब नीति आयोग कह रहा है कि उसे इसके बारे में जानकारी नहीं है। लोग कह रहे हैं कि ‘पंद्रह लाख रुपए हर खाते में’ वाले जुमले की तरह यह भी एक जुमला साबित हुआ है।

जदयू ने प्रधानमंत्री मोदी पर विधानसभा चुनाव के समय राज्य के लिए की गई विशेष पैकेज की घोषणा के जरिये जनता को ठगने का आरोप लगाते हुए गुरूवार को कहा कि कागजी विज्ञप्ति बनकर रह गई इस घोषणा के बारे में नीति आयोग के पास कोई सूचना नहीं है, जो साबित करता है कि यह एक राजनीतिक स्कैंडल के सिवा कुछ नहीं है।

जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार और राजीव रंजन प्रसाद ने यहां संवाददाता सम्मेलन में इस घोषणा के बारे में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगे गये जवाब का दस्तावेज उपलब्ध कराया। कुमार ने कहा कि मोदी ने विधानसभा चुनाव के समय बिहार की बोली लगाते हुये लोगों से पूछा था ‘कितना लोगे’ और एक लाख पच्चीस हजार करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की थी लेकिन दो वर्ष नौ माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी घोषणा पर अमल नहीं किया गया। यह राज्य की जनता के साथ ठगी नहीं तो और क्या है।
कुमार ने कहा कि इस घोषणा का विवरण 18 अगस्त 2015 को भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय की वेबसाइट और प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रेस विज्ञप्ति के रूप में तो उपलब्ध है लेकिन आरटीआई से प्राप्त जवाब में घोषणा को मूर्त रूप देने के लिए अधिकृत एजेंसी नीति आयोग के वित्तीय संसाधन संभाग ने कहा कि उसके पास इस घोषणा बारे में कोई सूचना नहीं है।

उन्होंने कहा कि मोदी के राज्य की जनता से किये झूठे वादे को राजनीतिक स्कैंडल कहा जाये तो गलत नहीं होगा। यदि मोदी वादे पूरे नहीं कर सकते तो उन्हें राज्यवासियों से माफी मांगनी चाहिए।