एनडीए से अलग हुई 16 सांसदों वाली बड़ी पार्टी, भाजपा के मिशन 2019 के लिए बढ़ाई मुश्किलें !

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नई दिल्ली, 2019 के लोकसभा चुनाव में अब करीब करीब एक साल का ही समय बचा है ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी बिसात बिछा रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली कई पार्टियों ने धीरे धीरे भाजपा का साथ छोड़ना शुरू कर दिया है। सबसे पहले शिव सेना ने एनडीए से अलग होने की घोषणा की थी। शिव सेना के बाद अब आंध्रा प्रदेश की सत्त्ताधारी तेलगु देशम पार्टी ने भी एनडीए से अलग होने का फैसला कर लिया है। टीडीपी के अलग होने की अटकलें काफी दिनों से लग रही थीं।

आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने से केंद्र सरकार के इनकार के बाद तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने हालांकि बुधवार शाम को वित्त मंत्री अरुण जेटली के जरिये डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की। लेकिन यह सफल नहीं रहा। केंद्र में टीडीपी के दोनों मंत्री अशोक गजपति राजू और वाईएस चौधरी बृहस्पतिवार सुबह मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे देंगे। टीडीपी के लोकसभा में 16 सांसद हैं।

पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी के नेता चंद्रबाबू नायडू ने देर रात कहा कि हमारे मंत्रियों का इस्तीफा पहला कदम है। पार्टी एनडीए से अलग होगी। उन्होंने कहा कि पीएम ने हमें मिलने का वक्त भी नहीं दिया और अरुण जेटली के बयान ने साफ कर दिया कि वे आंध्र प्रदेश की मदद नहीं करेंगे। अब आंध्र प्रदेश की सरकार में शामिल भाजपा के मंत्री भी जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं।

पिछले कई दिनों से टीडीपी सांसद लोकसभा और राज्यसभा दोनों में अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उन्हें बुलाकर साफ कह दिया कि वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार किसी भी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
क्योंकि एक राज्य को यह सुविधा देने से दूसरे राज्यों से भी ऐसी मांग उठेगी और केंद्र सरकार इतना वित्तीय बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विशेष दर्जे के बराबर राज्य को सभी वित्तीय सहायता देने के लिए तैयार है।

टीडीपी इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने भी घोषणा कर दी है यदि मार्च के अंत तक आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिला तो अप्रैल के प्रथम सप्ताह में उसके सभी विधायक विधानसभा से इस्तीफा दे देंगे। आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अब बमुश्किल एक साल बचा है इसलिए टीडीपी किसी भी सूरत में इस मुद्दे को विपक्ष के पाले में नहीं जाने देना चाहती। यही वजह है संसद से लेकर सड़क तक वह इस मुद्दे पर राजनीति गरमाए हुए है।

चंद्रबाबू नायडू ने देर रात कहा कि हमने प्रधानमंत्री से बात करने की कोशिश की थी। करीब एक महीने से उनसे मिलने का समय मांग रहे थे, लेकिन चार दिन पहले उन्हें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिलने का समय मिला। हमसे कहा गया कि आप अमित शाह से मिल लीजिए। उन्होंने बताया कि साथ छोड़ने की जानकारी देने के लिए भी उन्होंने पीएम से बात करने की कोशिश की, लेकिन वह लाइन पर नहीं आए।

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