PM आवास के बाहर घास खाते किसान तो आपने देखे होंगे, आज ये सिर मुंड़वाये शिक्षिकाओं को भी देखिये !

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किसान,अध्यापक,महिलायें और नौजवान सब के सब भाजपा के आतंक और तानशाही से परेशान, क्या यही है मेरा देश महान ! क्या यही हैं देश के अच्छे दिन !

भोपाल : केंद्र के साथ कई प्रदेशों की सत्ता में काबिज भाजपा अपने घमंड के चलते मद में डूबी हुई है। जनता की हर मांग को भाजपा सरकार अपनी तानाशाही के चलते अनसुना कर रही है। ऐसी ही घटना के विरोध में मध्यप्रदेश के शिक्षा कर्मियों ने सिर मुंडवा कर अपने अधिकारों के प्रति सरकार का ध्यान खींचने की कोशिश की है। राजधानी में अध्यापक अधिकार यात्रा के तहत शिक्षक और शिक्षिकाओं दोनों ने अपने सिर मुंडवाए।

गौरतलब है कि यूपी,एमपी,बिहार,तमिलनाडु,ओड़िशा से लेकर राजस्थान तक पूरे देश में ऐसे आन्दोलनों का दौर चल रहा है, यूपी समेत सभी प्रदेशों में शिक्षकों पर बर्बर लाठीचार्ज हो रहे हैं। देश का किसान प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करते हुए घांस खाने के साथ अपनी पेशाब पीने तक को मजबूर है। एमपी में शिक्षिकाएं सरकार के विरोध में शरीर की सुंदरता के प्रतीक अपने बाल कटवा रही हैं। पूरे देश में सभी जगह एक सा अराजकता जैसा माहौल है। युवाओं के पास रोजगार नहीं, किसान कर्ज से परेशान, मजदूर काम ना मिलने से परेशान, महिलायें छेड़खानी और बलात्कार से परेशान हैं। देश में इतना सब कुछ हो रहा है पर फिर भी हमारे देश के पीएम मोदी जी कहते हैं – देश बदल रहा है, अच्छे दिन आ गए हैं।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अध्यापक अधिकार यात्रा के तहत शिक्षाकर्मियों ने अपना विरोध दर्ज कराया है। अपनी मांगों के समर्थन में टीचरों ने अपना सिर मुंडवाया। शिक्षाकर्मी लंबे समय से समान कार्यों के लिए समान वेतन और उचित ट्रांसफर नीति की मांग करते रहे हैं। शिक्षाकर्मियों ने इसके साथ ही अन्य मांगें भी उठाई हैं।

सरकार की वादा खिलाफी से नाराज होकर महिला अध्यापकों ने अपने ऐलान के मुताबिक मुंडन कराया। आजाद अध्यापक संघ की प्रांत अध्यक्ष शिल्पी शिवान समेत कई महिला अध्यापकों ने सिर मुंडाया।

इस घटना पर पूरे राज्य में काफी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। अध्यापक लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि उनकी नौकरी स्थायी की जाए और समान कार्यों के लिए समान वेतन दिया जाए। शिक्षकों ने आंदोलन के तहत ज्ञापन, हड़ताल, रैली और कई बार प्रदर्शन किए। लेकिन महिला अध्यापकों ने सरकार की वादा खिलाफी से नाराज होकर यह बड़ा कदम उठाया।

सरकार ने अध्यापकों से जंबूरी मैदान में विरोध प्रदर्शन के लिए 1 लाख 44 हजार रूपये किराया मांगा !

शिक्षक संगठन ने आरोप लगाया है कि सरकार आंदोलन को दबाने के हथकड़े अपना रही है। संगठन के पदाधिकारी रितुराज तिवारी ने कहा कि, ‘विरोध प्रदर्शन के लिए जुटने वाले करीब 25 हजार अध्यापकों को आंदोलन में शामिल होने की इजाजत नहीं दी गई।

बीते दो हफ्ते से प्रशासनिक अधिकारियों ने पदाधिकारियों को शहर में आंदोलन के लिए जगह देने से ही मना कर दिया। अधिकारियों ने बीएचईएल के जंबूरी मैदान पर विरोध प्रदर्शन के लिए 1 लाख 44 हजार रूपये किराया मांगा। पदाधिकारियों के मुताबिक बीएचईएल प्रबंधन को चंदा कर किराये का भुगतान किया जाएगा।

गौरतलब है कि शिक्षा विभाग में संविलियन, मृतक अध्यापकों के परिवार के सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति, वेतन विसंगति, पदोन्नति और सातवें वेतनमान का लाभ देने की मांगों को लेकर अध्यापक लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है।

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