क्या यही है मोदी सरकार का न्याय – खराब खाने की शिकायत करने वाले तेज बहादुर BSF से बर्खास्त

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लखनऊ, BSF के कुछ अफसरों द्वारा BSF के लिए आने वाले खाने को बाजार में बेचने और BSF के जवानों को खराब खाना प्रोवाइड करने पर कुछ महीने पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर खराब खाने की शिकायत करने वाले BSF जवान तेज बहादुर यादव को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। वीडियो में तेज बहादुर यादव ने खराब खाने की शिकायत की थी। तेजबहादुर यादव ने अपने सीनियर अधिकारियों पर भोजन की राशि के नाम पर घपला करने का आरोप लगाया था। तेज बहादुर यादव ने अपने वीडियो में पीएम मोदी से न्याय की गुहार लगाईं थी। इसके बाद यह वीडियो वायरल हो गया था।

वीडियो में तेजबहादुर यादव ने आरोप लगाया था कि सैनिकों को पिछले 10 दिनों से लगातार जली हुई रोटी और पानी मिली हुई दाल खाने में दी जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कई बार जवानों को भूखा रहना होता है। यादव 2032 में रिटायर होने वाले थे लेकिन उससे पहले ही BSF ने उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। खबरें ऐसी भी आई थीं कि यादव ने इस विवाद के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की अर्जी दी थी लेकिन उस पर कोई फैसला लेने से पहले अधिकारियों ने उसे बर्खास्त कर दिया।

इससे पहले तेज बहादुर यादव के परिवार ने दावा किया था कि वो गायब हो गए हैं, उन्हें सामने लाने के लिए परिवार कोर्ट में गुहार लगाएगा। परिवार का दावा था कि उन्हें तेज बहादुर के बारे में कोई जानकारी नहीं है कि वे कहां हैं। तेज बहादुर की पत्नी के भाई विजय ने बताया था कि परिवार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो रहा है।

परिवार ने दावा किया था कि इस बारे में बीएसएफ को दो पत्र भी लिखे लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। विजय ने बताया था कि तेज बहादुर यादव ने आखिरी बार अपनी पत्नी से बात की थी और कहा था कि BSF अधिकारी उसे अज्ञात जगह पर ले जा रहे हैं। इससे ज्यादा वह बोल नहीं पाए। सूत्रों के अनुसार, आज के मुद्दे पर भी तेजबहादुर की पत्नी ने कहा कि क्या बीएसएफ की तरफ से यही न्याय है?

इस मुद्दे पर BSF का कहना है कि तेज बहादुर ने झूठी शिकायत करके फोर्स की इमेज खराब करने की कोशिश की। कोर्ट ऑफ इंक्वॉयरी में यह बात सामने आई कि जिन भी जवानों से पूछताछ की गई, उनमें से किसी ने भी खराब खाना परोसे जाने की शिकायत नहीं की। BSF प्रवक्ता सुवेंदू भारद्वाज ने बताया कि BSF एक अनुशासित बल है उसमें सबकी अपनी सीमाओं और मर्यादाएं तय हैं। इस मामले में भी हमारे कोर्ट ने सारे मामले की जांच की और उसके बाद ही यह फैसला आया है। BSF की न्यायप्रक्रिया के भी तय मापदंड हैं।

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