एक माँ नोट बदलने के लिए लाइन में लगी तो देश की सहानुभूति मिली, वहीँ नजीब की माँ का यह हाल !

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नई दिल्ली : जेएनयू कैंपस के अंदर से लापता हुए छात्र नजीब अहमद को गायब हुए एक साल से ज्यादा का समय हो चुका है। ऐसे में अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी तक न होने पर नजीब की मां ने सीबीआई मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। लेकिन पुलिस की ओर से नरमी बरतने के बजाय उन्हें एक बार फिर से उन्हें घसीटकर धरना स्थल से हटाया गया।

सोशल मीडिया यूजर अनुराग यादव “मैनपुरी” ने लिखा –
1) एक मां नोट बदलने के लिए लाइन में लगी तो पूरे देश की सहानुभूति मिली, वहीँ एक मां पिछले एक साल‌ से पूंछ रही है कि उसका बेटा आखिर है कहां ? जिंदा है या मर गया ?
कुछ तो बता दो देश के बादशाह !!

2) सीबीआई के पास लालू की जांच करने का खूब समय है लेकिन नजीब के संबंध में एक कदम नहीं बढ़ पाई ??
इस पर भी कुछ तो बता दो देश के बादशाह !!

नजीब अहमद, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से 15 अक्तूबर 2016 के बाद कैंपस से लापता है। वह एमएससी बायोटैकनॉलजी के पहले साल का विद्यार्थी है। 14 अक्टूबर 2016 को उसके और एबीवीपी के लोगों के बीच झगड़ा हुआ।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय अध्यापक संघ ने प्रशासन को इस मुद्दे के प्रति बेरुख़ी और पक्षपाती प्रबंधन के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है। जेएनयू अध्यापक संघ ने यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की गई 25-बिन्दु बुलेटिन की भी आलोचना की है कि वह जानबूझकर यह तथ्य छोड़ दिया है कि एक रात पहले हुए झगड़े के दौरान अहमद पर हमला किया गया था। नजीब अहमद की माँ फ़ातिमा नफ़ीस ने जेएनयू के प्रशासन पर यह आरोप लगाया है कि वे असंवेदनशील हैं।

नजीब अहमद का केस दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपा गया है। कोर्ट ने केस सीबीआई को सोपंते हुए विशेष निर्देश दिए थे कि केस की जांच की अगुआई कम से कम डीआईजी रैंक के अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह आदेश नजीब अहमद की माँ फातिमा नफीस द्वारा लगाई गई याचिका पर दिया था ।

दिल्ली पुलिस नजीब के ठिकाने के बारे में जानकारी देने के लिए 100,000 रुपये के इनाम का ऐलान किया है। दिल्ली पुलिस की SIT इस केस की पड़ताल कर रहा है। लेकिन एक साल बाद भी नजीब का पता नहीं चल सका है और न ही किसी आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।

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