UP में BJP का बुरा हाल, मेरठ में पीएम मोदी की रैली में 17 विधानसभाओं से नहीं जुट पाए 1 लाख समर्थक

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नोएडा, भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश की सत्ता से 15 साल से दूर है। 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के फेस पे चुनाव लेन वाली भाजपा ने जबर्दस्त सफलता हासिल की थी। बीजेपी ने 2014 में यूपी से अकेले 72 सांसद जिताये। जिससे ये उम्मीद लगाईं जा रही थी कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 15 साल का वनवास 2017 में ख़त्म कर सकती है।

2014 में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने जनता से जो वादे किये थे पिछले तीन सालों में उनमें खरी नहीं उतर पायी है। जिसकी वजह से आम जनता में केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रोश व्ययाप्त है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा 2014 में किये गए 15 लाख रूपये देने के वादे को चुनावी जुमला बताने से आम जनता से बीजेपी द्वारा किये जा रहे वादों से विश्वास उठ गया है। जिसका असर यूपी चुनाव में पीएम मोदी की रैली में दिखने को मिल रहा है।

शनिवार को मेरठ के जिस मैदान में पीएम मोदी की रैली हुई उसी मैदान में नरेन्द्र मोदी जी की रैली हुई थी 2014 में रैली के दौरान करीब 3.50 लाख लोगों के आने का दावा किया गया था। तो वहीं करीब 3 साल बाद उसी मैदान में मुश्किल से 1 लाख लोग भी नहीं पहुँच पाए। मैदान में ज्यातर कुर्सियां खाली पड़ी रही। जबकि रैली को सफल बनाने के लिए मेरठ से लेकर गाजियाबाद, नोएडा समेत 17 विधानसभाओं के प्रत्याशियों को रैली में भीड़ जुटाने के लिए कहा गया था। तीन सालों में पीएम मोदी की लोकप्रियता में वेस्ट यूपी में 3 गुना कमी आ गयी है।

पीएम मोदी की रैली में कम संख्या को देखते हुए संगठन के लोगों को पुलिस और प्रशासन से गुजारिश करनी पड़ी कि लोगों को बिना चेेकिंग के ही अंदर आने दिया जाए। ताकि थोड़ी भीड़ बढ़ सके। इसके अलावा रैली के आसपास संघ और बीजेपी कार्यकर्ताओं को रैली स्थल पर लाने का काम भी सौंपा गया था। आसपास के जिलों से आई बसों में भी कोई खास भीड़ नहीं थी।

2 फरवरी 2014 को जब नरेंद्र मोदी मेरठ में लोकसभा चुनाव के दौरान रैली करने के लिए आए थे तब माधव कुंज के इसी रैली स्थल पर करीब 3.50 लाख लोग मौजूद हुए थे लेकिन इस बार भीड़ करीब तीन गुना कम रही है। इस बारे में जब पश्चिमी उत्तरप्रदेश के प्रभारी आलोक सिसौदिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ये एक चुनावी रैली थी, जबकि 2014 की रैली चुनावी नहीं थी।

वर्ष 2014 की रैली में सबसे बड़ी खास बात ये थी कि उसमें महिलाओं और किसानों की संख्या काफी ज्यादा थी। जबकि इस बार इन दोनों ही वर्गों की संख्या इस रैली में काफी कम दिखाई दी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसानों कि नाराजगी भारतीय जनता पार्टी से बढ़ गई है। जो वादे लोकसभा चुनाव के बाद सरकार द्वारा किए गए थे वो पूरे नहीं हुए हैं। जिस कारण किसान इस रैली से थोड़ा झिटका हुआ दिखाई दिया।

 

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