सहारनपुर दंगे की सच्चाई क्यों भड़काया गया दलितों और मुस्लिमों को

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लखनऊ, प्रदेश की बीजेपी सरकार के 1 महीने के कार्यकाल में ही सहारनपुर सुलग उठा बीजेपी नेताओं ने सुनियोजित तरीके से हिंसा भड़काने का काम किया। यूपी की नई सरकार में 20 अप्रैल को अंबेडकर जयंती जुलूस के दौरान सांप्रदायिक दंगा हुआ, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए थे।

आरोप है कि स्थानीय भाजपा सांसद के नेतृत्व में एसएसपी पर हमला किया गया। सड़क दुधली गांव के दलित निवासियों का कहना है कि वे 14 अप्रैल को पहले ही अंबेडकर जयंती मना चुके थे और 20 अप्रैल को होने वाले जुलूस के बारे में कुछ जानकारी नहीं थी। इसके अलावा इस जुलूस के आयोजक अशोक भारती सड़क दुधली गांव के रहने वाले नहीं है और कोई नहीं जानता कि वह कहां से यहां आए।

आर्मी रेमाउंट डिपो में काम करने वाले गांव के 55 वर्षीय चंद्र पाल ने कहा, हम प्रत्येक साल अंबेडकर भवन में अंबेडकर जयंती को मनाते हैं। इस साल भी 14 अप्रैल को हमने अंबेडकर जयंती को मनाया। और इस मौके पर मौजूद सभी लोगों को प्रसाद वितरित किया। अंबेडकर जयंती पर हमारे गांव में कोई जुलूस नहीं रखा गया था।

पाल ने आगे कहा, एक दशक पहले हम हर साल रविदास जयंती पर एक जुलूस ले जाते थे। हमारे मुस्लिम मित्रो ने न केवल पैसा दान किया बल्कि हमें अपने बैलगाड़ियां और ट्रैक्टर ट्रालियां देकर हमें खुशी दी। जुलूस गांव का चक्कर लगाता और फिर एक भण्डारे (दावत) का आयोजन किया जाता था। जिसमें मुस्लिम और उनके बच्चों और महिलाओं द्वारा भी हिस्सा लिया जाता था। लेकिन अब वह दिन चले गए हैं। चंद्र पाल की कही बातों की पुष्टि गांव के जहांगीर अहमद (45) और उनके पुत्र नियाज अहमद (20) करते हैं।

गांव के एक अन्य ग्रामीण अरविंद कुमार ने कहा, हमें अंबेडकर के नाम पर किए जाने वाले किसी भी जुलूस के बारे में सूचित नहीं किया गया था। अनुसूचित जाति के करीब 80 परिवार गांव के उत्तरी छोर पर रहते हैं। हममें से कोई भी जुलूस के बावजूद किसी भी जुलूस के बारे में नहीं जानता था। हमारे घरों के पास स्थित अंबेडकर भवन समाप्त हो गया। इसके अलावा, जब हम अंबेडकर जयंती पहले ही देख चुके थे तो जुलूस निकालने का मतलब क्या था?

यही नही बीजेपी MP द्वारा एसएसपी आवास पर पथराव करवाया गया। एसएसपी आवास के सीसीटीवी कैमरे तोड़े गए नेम प्लेट तोड़ी गयी। आवास के भीतर उत्पात मचाया गया।

सहारनपुर (शहर) निर्वाचन क्षेत्र की सीट से समाजवादी पार्टी विधायक संजय गर्ग ने कहा, नागरिक चुनाव नजदीक हैं और नई सीमा तय होने के बाद से सदक दुधली गांव को नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत शामिल किया गया है। यह दलित मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए भाजपा का अत्यधिक निंदा करने वाला प्रयास था।

Source NationalDastak.com

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