यूपी में हुये पुलिस एनकाउंटर को फर्जी बताने वाले परिवारों पर, गैंगरेप जैसे केस ठोक रही योगी सरकार !

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लखनऊ : यूपी में अपराध आज 14 साल के रिकॉर्ड स्तर पर है, वही योगी सरकार 1400 पुलिस एनकाउंटर करके स्वयं ही अपनी वाह-वाही लूट रही है जबकि इन मुठभेड़ों पर फर्जी होने के सवाल उठे हैं। पुलिस के अनुसार इन एनकाउंटर में 40 अपराधी (कथित) मारे गए, 247 कथित क्रिमिनल घायल भी हुए। वहीँ आरोप लगे कि पुलिसवाले इनाम के लालच में फर्जी एनकाउंटर्स कर रहे हैं, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुये कहा कि एनकाउंटर कोई प्लानिंग करके नहीं किया जाता। अपराधियों को पकड़ने की कोशिश करती पुलिस पर जब हमला होता है, तो जवाबी कार्रवाई की जाती है। इस बीच कुछ मारे गए कथित गैंगस्टर्स के परिवारवालों ने यूपी पुलिस और योगी सरकार पर गंभीर इल्जाम लगाए हैं, उनका कहना है कि पुलिस उनके परिवार पर दबाव बनाने के लिए गैंगरेप जैसे फर्जी मामलों में फंसा रही है।

पहली स्टोरी – सुमित गुर्जर एनकाउंटर केस !

कैराना में एक गांव है – चिरचिता, यहां सुमित गुर्जर नाम का एक किसान मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस का कहना था कि सुमित नोएडा में एक कार के अंदर जा रहा था, जब पुलिस ने उसका पीछा किया। इसी दौरान एनकाउंटर में उसकी मौत हो गई, सुमित के परिवारवाले पुलिस के दावे को खारिज करते हैं। सुमित के पिता हैं करम सिंह, उनका कहना है कि सुमित को फंसाया गया। किसी और सुमित नाम के शख्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज था, उसे बचाने के लिए या पुलिस गलती से उस सुमित की जगह पुलिस इस सुमित को उठा ले गई और एनकाउंटर में इसे फ्रेम कर दिया। करम सिंह का कहना है कि सुमित को कार चलाना ही नहीं आता था, जबकि पुलिस का कहना है कि वो कार चलाकर भागा ? उनका कहना है कि पुलिस ने लोकल बाजार से सुमित को उठाया और फिर एनकाउंटर में उसे मार दिया। जब सुमित के परिवार ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए, तो उसके भाई और दो चचेरे भाइयों पर गैंगरेप का केस दर्ज कर दिया गया।

करम सिंह ने बताया : ‘सुमित को कार चलाना नहीं आता था, तो कार चलाकर कैसे भाग सकता था’

उन्होंने (UP पुलिस ने) मेरे बेटे को कत्ल करने से पहले उसे बहुत सताया, यातनाएं दी। जब पुलिसवालों को महसूस हुआ कि वो गलत सुमित को उठा लाए हैं, तो उन्होंने एक मुखबिर के हाथों हमें संदेश भिजवाया। साढ़े तीन लाख रुपये मांगे हमसे, अगले दिन हम पैसे लेकर नोएडा थाने पहुंचे तो हमसे कहा गया कि केस बहुत आगे पहुंच गया है। उसी शाम को हमें बताया गया कि सुमित मुठभेड़ में मारा गया। उन्होंने कहा कि स्थानीय बीजेपी नेता ने हमारी मदद करने की कोशिश की, लेकिन वो भी ज्यादा कुछ नहीं कर सके। हमें इंसाफ चाहिए, इस हत्या के लिए जो भी दोषी हैं, उन्हें सजा दिलवाने के लिए मैं किसी भी हद तक जाऊंगा। पुलिस चाहती है कि हम शिकायत वापस ले लें, इसीलिए उन्होंने हमारे लड़कों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं।

दूसरी स्टोरी – नॉएडा में जीतेन्द्र यादव एनकाउंटर !

नोएडा के सेक्टर 122 स्थित चौकी में तैनात दरोगा विजय दर्शन शर्मा ने एक युवक को सिर्फ इसलिए गोली मार दी क्योंकि वो यादव था और उसे एनकाउंटर करके सरकार से इनाम चाहिए था । सेक्टर 122 स्थित सीएनजी पम्प पर शनिवार रात करीब 10 बजे दरोगा विजय दर्शन शर्मा ने स्कार्पियो सवार युवकों को रोका और उन पर वर्दी का रौब झाड़ने लगा। जब युवकों ने दरोगा से रोके जाने की वजह पूँछी और बताया कि वह अपनी बहन के यहाँ से किसी कार्यकर्म से लौट रहे हैं। स्कार्पियो सवार युवक जीतेन्द्र यादव ने जैसे ही अपना नाम बताया तो नाम सुनते ही दरोगा विजय दर्शन शर्मा ने युवक के गले से सटाकर गोली मार दी ताकि बचने का कोई भी चांस न हो। साथ ही उसने जीतेन्द्र यादव के एक साथी को भी गोली मारी। हालाँकि पुलिस का कहना है कि दरोगा और जीतेन्द्र एक-दुसरे को पहले से भी जानते थे और ये निजी दुश्मनी के चलते हुआ है। वहीँ दरोगा द्वारा एनकाउंटर बताये जाने की अगली ही सुबह यूपी पुलिस के DGP ने इस एनकाउंटर पर यु टर्न ले लिया था।

यही नहीं दरोगा ने अपनी करतूत छुपाने के लिए इस घटना को एनकाउंटर बता दिया। जिसमें एक निर्दोष युवक जीतेन्द्र यादव को गोली मार दी जबकि जीतेन्द्र यादव के ऊपर एक भी पुलिस केस नहीं है और वह एक जिम ट्रेनर है । वहीँ आज जीतेन्द्र का जीवन पूरी तरह बर्बाद हो चूका है क्योंकि गले के नीचे का हिस्सा कोमा में है और शरीर में कोई भी हलचल नहीं है। वही योगी सरकार ने उच्च सदन के द्वारा इस मामले की CBI जांच के आदेश दिए जाने पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

तीसरी स्टोरी – नौशाद एनकाउंटर !

मुजफ्फरनगर में भूरा नाम का एक गांव है, इसमें रहने वाले नौशाद नाम के एक शख्स पर 2012 में गैंगस्टर्स ऐक्ट लगा था। 29 जुलाई, 2017 को एक कथित एनकाउंटर में नौशाद मारा गया, इस बात को एक साल होने आया लेकिन नौशाद का परिवार अब भी सहमा हुआ है। उनके मुताबिक, उन्होंने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए उसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में चुनौती दी थी इसके बाद योगी सरकार की यूपी पुलिस द्वारा घर के सारे मर्दों पर गैंगरेप का इल्जाम लगाकर मुकदमा दर्ज कर दिया गया ।

गौरतलब है कि इस गैंगरेप के केस की टाइमिंग गौर करने वाली है, नौशाद का परिवार 3 अगस्त, 2017 को शिकायत दर्ज कराने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) पहुंचा था। उसके अगले ही दिन यूपी पुलिस उनके घर पहुंची और नौशाद के भाई, चाचा समेत घर के सारे मर्दों के खिलाफ गैंगरेप का केस दर्ज हो गया।

नौशाद के भाई इमाम हैं, उन्होंने कहा –

हमारी गलती इतनी है कि हम गरीब हैं, हमारा घर देखिए, क्या ये किसी बड़े क्रिमिनल का घर लगता है ? हमने शिकायत दर्ज कराई, इसी वजह से पुलिस हमें परेशान कर रही है। हम पर गैंगरेप का झूठा इल्जाम लगाया गया है, पुलिस हमारे पूरे परिवार को ही अपराधियों के तौर पर पेश कर रही है। वो शिकायत वापस लेने के लिए अधिकारियों को लगातार हमारे घर भेजते रहते हैं, अगर कोई मदद नहीं मिली, तो वो लोग जिस पर कहेंगे, हमें हर उस दस्तावेज पर अंगूठा लगाने के लिए मजबूर कर दिया जाएगा।

चौथी स्टोरी नौशाद के दोस्त सरवर की –

सरवर का परिवार सामने नहीं आ रहा है, जबकि सरवर के परिवार के मर्दों पर भी गैंगरेप का केस दर्ज हुआ है। यहाँ भी ये सब NHRC में शिकायत दर्ज होने के बाद हुआ, नौशाद के अब्बू जमील और सरवर के रिश्तेदार वसील की तरफ से NHRC में एक हलफनामा दाखिल किया गया था। इसके मुताबिक 28 जुलाई, 2017 को यूपी पुलिस की एक महिला मुखबिर नौशाद और सरवर को झांसा देकर अपने घर ले गई। जब दोनों काफी देर तक नहीं लौटे, तो परिवारवालों ने उसी दिन रात को पुलिस से संपर्क किया। अगली सुबह स्थानीय लोगों से पता चला कि नौशाद और सरवर मुठभेड़ में मारे गए, पुलिस उनकी लाशों को साथ ले गई थी। परिवारवालों का ये भी कहना है कि कथित महिला मुखबिर के घर के बाहर बहुत सारा खून फैला हुआ था।

पांचवी स्टोरी – फुरकान एनकाउंटर !

जेल से रिहा होने के बाद एनकाउंटर में मारा गया –

शामली जिले में तित्तरवाड़ा नाम का गांव है, यहां रहते हैं मीर हसन। उनका बेटा फुरकान 23 अक्टूबर, 2017 को पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया। उसके सिर पर 50 हजार का इनाम था, जबकि फुरकान सात साल जेल की सजा काटने के बाद कुछ दिन पहले ही रिहा हुआ था। रिहाई के कुछ ही दिन बाद वो एनकाउंटर में मारा गया, फुरकान के घरवालों को शक है कि ये फर्जी मुठभेड़ थी।

फुरकान मर चुका है, अब मीर हसन को अपने तीन बेटों की जान का डर सता रहा है। उन्होंने कहा –

देखिए पुलिस ने हमारे साथ क्या किया, मेरा परिवार तबाह हो गया। उन्होंने मेरे बेटे को कत्ल कर दिया, अब वो मेरे बाकी बेटों के पीछे पड़े हैं। उनमें से तीन के खिलाफ झूठे केस दर्ज किए गए हैं, उन्हें भी अपराधियों के तौर पर पेश किया जा रहा है। जो भी हो, लेकिन मैं पुलिस के साथ समझौता नहीं करुंगा, न ही अपनी शिकायत वापस लूंगा। गौरतलब है कि फुरकान के घरवालों ने भी इस फर्जी एनकाउंटर के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में चुनौती दी थी और इसी शिकायत को वापस लेने के लिए पुलिस गैंगरेप जैसे फर्जी मुकदमों के जरिये फुरकान के घरवालों पर दबाव बना रही है।

Story Credit – The Lallantop

एनकाउंटर में मारे गए लोगों के परिवारों पर दर्ज हुए फर्जी मुकदमों की FIR देखने के लिए यहाँ क्लिक करें !

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