उत्तर प्रदेश की विधानसभा में क्यों गरजी AK-47 !

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश की 17वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को शुरू होते ही, विपक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई में बदहाल होती कानून-व्यवस्था के मुद्दे को जबरदस्त तरीके से सदन में उठाने के चलते जोरदार हंगामे के बीच शुरू हुआ । सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यपाल राम नाईक ने अभिभाषण पढ़ना प्रारम्भ किया लेकिन विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया और राज्यपाल की ओर कागज के गोले फेंके, उन्हें राम नाईक से दूर रखने के लिये सुरक्षाकर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी ।

यूँ तो सपा अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विधानसभा में सिर्फ 47 विधायक ही हैं,पर आज सदन में ये सभी AK-47 की तरह गरजे और राज्यपाल राम नाईक पर कागजी गोलों के रूप में खूब बरसे भी । हालाँकि इस दौरान विधान परिषद के सपा सदस्य भी सदन में उपस्थित थे और सभी ने सदन को विपक्ष के रूप मेंं सपा की बड़ी ताकत के साथ युवा जोश को भी दिखाते हुये,ये दर्शा दिया कि अगर सरकार ने कानून-व्यवस्था और गरीबों पर होते अत्याचारों पर जल्द एक्शन नहीं लिया तो सपा सदन से लकर सड़क तक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी करेगी ।

राज्यपाल का पूरा अभिभाषण सुनने की विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित की अपील का विपक्षी सदस्यों पर कोई असर होता नहीं दिखा और सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने पहले ही घोषणा की थी कि वह सरकार को कानून-व्यवस्था तथा कुछ अन्य मुद्दों पर घेरेगी ।

शोरशराबे और हंगामे के बीच राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ा,राम नाईक बीच-बीच में विपक्षी सदस्यों के रवैये को सवालिया नजरों से देखते और इशारों में आपत्ति जताते रहे, इस दौरान सुरक्षाकर्मी राज्यपाल की ओर फेंके जा रहे कागजों को फाइल के सहारे रोकते देखे गए ।

ज्ञातव्य है कि राज्यपाल के अभिभाषण में राज्य सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं का जिक्र होता है, पर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में करीब 14 साल बाद भाजपा की सरकार बनी है और सरकार के 2 महीनों के ही समय में अपराध के मामले में प्रदेश ने सारे रिकार्ड़ दिये हैं । एक रिपोर्ट के अनुसार यूपी में पिछले 2 माह में- 56 ड़कैती,833 लूट,795 हत्या,771 बलात्कार के साथ यूपी 5 साल के अपराधिक शिखर पर पहुँच गया है । वहीं पहली बार राज्य विधानसभा की कार्यवाही का टेलीविजन पर सीधा प्रसारण किया गया ।

विधानसभा का पहला सत्र होने की वजह से राज्यपाल राम नाईक ने दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित किया, सत्र के पहले दिन जीएसटी को सदन पटल पर रखा जाएगा और मंगलवार को इस पर चर्चा होगी, सरकार को प्रदेश में एक जुलाई से जीएसटी लागू करना है । रविवार को विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, इस दौरान दीक्षित ने सभी दलों से सहयोग मांगा था ।

विधानसभा सत्र के दौरान योगी सरकार की मुख्य चुनौती कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर बनी हुई है, योगी सरकार बनने के 50 दिनों के भीतर ही उप्र में कई जगह जातीय हिंसा हुई है, इसे लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति बदहाल होने का आरोप विपक्ष लगा भी दिया है ।

सहारनपुर हिंसा के अलावा पिछले 50 दिनों के भीतर कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जब भाजपा के विधायक और सांसद ही कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने, गोरखपुर में भाजपा विधायक राधा मोहन दास द्वारा एएसपी चारू निगम को सार्वजनिक तौर पर फटकार लगाए जाने,अमेठी में विधायक का दरोगा को धमकाना का वीडियों,प्रतापगढ़ में विधायक के गुर्गों क दलितों को पीटना,शाहजहांपुर में विधायक दूारा दरोगा को धमकाने का आड़ियों,विधायक का अपनी भांजी से रेप आदि कई मुद्दे एैसे रहे जिसमें भाजपा माननीयों का आतंक चर्चा में रहा तथा इस पर भी विपक्षियों ने काफी हंगामा किया।

इसके अलावा आगरा में कई हिंदूवादी संगठनों की वजह से कानून-व्यवस्था को लेकर समस्याएं खड़ी हुई हैं, इन सभी मुद्दों पर विपक्षी दलों ने सदन के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है ।राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष राशिद मसूद का कहना है कि योगी सरकार के राज में प्रदेश के भीतर फिर से माफिया राज कायम होने लगा है, भाजपा के विधायक और सांसद ही कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं ।

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