BJP विधायक ने अस्पताल में ऑक्सीजन की जगह सप्लाई करवा दी जहरीली गैस, 20 लोगों की मौत !

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इलाहाबाद, गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से हुई सैकड़ों मौतों का मामला अभी शान्त भी नहीं हुआ था कि एक और खबर आ रही है जिसे मीडिया ने पूरी तरह से दबा दिया था। ये मामला जून महीने का है जब वाराणसी के सर सुंदर लाल अस्तपताल में ऑक्सीजन की जगह जहरीली गैस दिए जाने से 20 लोगों की मौत हो गई थी। मामला भाजपा विधायक से जुड़ा होने के चलते किसी को इसकी भनक तक नहीं लग पाई।

अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लेते हुए BHU से संबद्ध सर सुन्दर लाल अस्पताल में ऑक्सीजन की जगह औद्योगिक गैस आपूर्ति की वजह से 20 मरीजों की मौत के चलते यूपी की योगी सरकार से जवाब मांगा है। हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि 6-7 जून को औद्योगिक गैस से 20 मरीजों की मौत हो गई थी। याचिका में इन मौतों की सीबीआई जांच की मांग की गई है। याचिका की अगली सुनवाई की तिथि 27 अक्टूबर को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अमर सिंह चौहान की खण्डपीठ ने भुवनेश्वर द्विवेदी की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट ने अस्पताल में ऑक्सीजन आपूर्ति करने का ठेका देने की स्थिति सहित मौत पर महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा उत्तर प्रदेश और यूपी सरकार से जांच कर छह सप्ताह में विस्तृत हलफनामा मांगा है।

अस्पताल में इलाहाबाद के नैनी की पारेरहाट इण्डस्ट्रियल इंटरप्राइजेज प्रा.लि. दाउद नगर द्वारा औद्योगिक गैस की आपूर्ति की गयी। पारेरहाट कंपनी भाजपा विधायक हर्षवर्द्धन बाजपेयी की है। याची का कहना है कि पारेरहाट कंपनी को मेडिकल गैस उत्पादन करने का लाइसेंस ही नहीं मिला है। यह कंपनी न तो मेडिकल नाइट्रस आक्साइड और न ही मेडिकल आक्सीजन गैस का उत्पादन करती है।

याचिका में पूछा गया है कि, जब कंपनी में मेडिकल ऑक्सीजन बनती ही नहीं तो किन परिस्थितियों में कंपनी को अस्पताल में ऑक्सीजन गैस आपूर्ति का ठेका दे दिया गया। याची का आरोप है कि पिछले छह महीने में वाराणसी के सर सुन्दर लाल अस्पताल में ऑक्सीजन की जगह औद्योगिक गैस आपूर्ति की वजह से 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई है।

इसमें 50 से अधिक मौतों के कारण और पारेरहाट कंपनी को ऑक्सीजन गैस आपूर्ति ठेके की जांच सीबीआई से कराई जाए। कोर्ट ने महानिदेशक को एक कमेटी गठित कर प्रकरण की जांच कर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

योचिकाकर्ता भुवनेश्वर द्विवेदी ने बताया- पिछले 3 महीने में कुलपति से लेकर राष्ट्रपति तक 100 प्रार्थना पत्र और 56 आरटीआई दाखिल कर चुके हैं। हालांकि, अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, हैंड ऑफ महामना ऐरा संस्था के सेक्रेटरी लल्लन तिवारी ने बताया, बीएचयू में पहले लिंडा नाम की कंपनी ऑक्सीजन गैस सप्लाई करती थी। अब एमएस और कुलपति की सहमति से इसे कैंसिल कर इलाहबाद की एक कंपनी पारेरहाट से सप्लाई करवाई जाती है। जबकि, पारेरहाट के पास न तो गैस बनाने और न ही डि‍स्ट्रीब्यूट करने का लाइसेंस है। इस बात का खुलासा आरटीआई में हुआ है, जिसमें संयुक्त विकास आयुक्त औषधि ने जवाब दिया है।

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