देश की 85% आबादी (OBC-SC) को किनारे कर, 15% आबादी को 50% आरक्षण क्यों : सुनील सिंह साजन

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लखनऊ : समाजवादी पार्टी से MLC और टीम अखिलेश के चर्चित चेहरे सुनील सिंह यादव ‘साजन’ ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर हमारे संवाददाता से सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आरक्षण पर दिए गए फैसले पर कहा कि हम माननीय उच्चन्यालय के फैसले पर ऊँगली नहीं उठाते बस देश के 100 करोड़ लोगों से पूछना चाहता हूँ कि यह कहाँ का न्याय है की 15% सवर्णों की आबादी को 50% आरक्षण दिया जाए और 85 % पिछड़ों और दलितों की आबादी को सिर्फ 50% आरक्षण ही मिले। मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और उच्चतम न्यालय से ये अनुरोध करता हूँ की देश के संविधान में संशोदन करके – “जिसकी जितनी भागीदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी का कानून लागु किया जाए और देश की जातिगत जनगड़ना को सार्वजनिक किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण पर दिए गए फैसले पर समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह यादव ने सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया में अपना स्टेटमेंट शेयर किया है। उन्होंने कहा है कि, सु्प्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को आरक्षित वर्ग में ही नौकरी मिलेगी इससे तो पिछड़े और अनुसूचित जाति जनजाति के साथ अन्याय ही कहा जाएगा। क्योकि आबादी के हिसाब से भी देश में पिछड़े और अनुसूचित जाति जनजाति की संख्या अधिक है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने इस वर्ग के साथ अन्याय कर दिया है कि अगर आरक्षित वर्ग का व्यक्ति सामान्य से ज्यादा अंक भी लाता है तो उसे आरक्षित वर्ग में गिना जाएगा। यह कैसा न्याय और कैसी आरक्षण की प्रणाली है। जब जाति के हिसाब से सरकार ने गणना कराई तो क्यों नहीं जातियों के अनुरूप ही आरक्षण का प्रावधान कर दिया।

मेरा साफ तौर पर मानना है कि आरक्षण का आधार अगर सरकार कहती है कि आर्थिक तौर पर होना चाहिए तो उसके लिए भी प्रावधान बनाए। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए कि 85 प्रतिशत आबादी को 50 फीसदी से कम में बांध दिया जाए और 15 फीसदी आबादी को 50 प्रतिशत से ज्यादा का लाभ दिया जाए।

जिसकी जितनी संख्या उतनी उसकी भागेदारी। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने देश के हित में कहा था कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि जातियों में बंटा भारतीय समाज एक राष्ट्र की शक्ल कैसे लेगा और आर्थिक और सामाजिक ग़ैरबराबरी के रहते वह राष्ट्र के रूप में अपने अस्तित्व की रक्षा कैसे कर पाएगा? आज पिछड़े और दलित की संख्या सामान्य वर्ग से कितनी ज्यादा है लेकिन सरकारी नौकरियों में भागीदारी किसकी ज्यादा है। इस पर विचार करने की जरूरत है।

यहां यह बता दे कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने अब आरक्षण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी ने राज्य के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सों में से SC, ST और OBC का कोटा ख़त्म करने का आदेश पारित कर दिया है।आपको बता दें कि संविधान के मुताबिक देश के सरकारी शिक्षण संस्थानों में ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों को आरक्षण देने का प्रावधान है। लेकिन आरक्षण का यह नियम निजी संस्थानों और माइनॉरिटी स्टेटस वाले संस्थानों के लिए बाध्यकारी नहीं है।

अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा की सरकार की मंशा क्या है। आज पिछड़े और दलित को 27 और 22 प्रतिशत का आरक्षण देकर बांध दिया गया है। लेकिन हमारी मांग है कि जिसकी जितनी भागेदारी उसकी उतनी हिस्सेदारी होनी चाहिए। यह कहकर पिछड़ों और दलितों के साथ न्याय नहीं कहा जा सकता है कि इस वर्ग का व्यक्ति केवल आरक्षण के दायरे में आएगा। अगर वह सामान्य वर्ग के विद्यार्थी को मात दे सकता है तो उसे सामान्य वर्ग का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए देश भर के पिछड़े और दलित वर्ग को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी।