मुजफ्फरनगर दंगा तत्काल रोकने को अखिलेश ने 1 दिन बाद ही बुलाई थी आर्मी,वहीं सरहानपुर हिंसा पर योगी मौन !

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सहारनपुर : सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में शब्बीरपुर में दलित-ठाकुरों के बीच हुए बवाल को लेकर रामपुर मनिहारान में मंगलवार को भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सवारियों से भरी रोडवेज बस,पुलिस चौकी और सैकड़ों वाहनों को आग लगाने के बाद,पूरे शहर में घूम-घूमकर आगजनी वा तोड़फोड़ की जिससे करोड़ों के राजस्व हानी का अनुमान लगाया जा रहा है । वहीं भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने ठाकुरों के प्रति व्याप्त नाराजगी में महाराणा प्रताप भवन में तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी ।

गौरतलब है कि यूपी के मजफ्फरनगर में जब 2013 में दंगे भड़के थे तो तत्कालिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्थानीय पुलिस को विफल होता देख ,अगले ही दिन भारतीय सेना की मदद मांग ली थी,जिससे दंगा रोकने में सरकार को सफलता भी मिली थी

वहीं आज सहारनपुर में व्याप्त चिंताजनक और उग्र माहौल को शान्त करने में स्थानीय पुलिस पूरी तरह विफल रही है तथा केन्द्र की मोदी सरकार और राज्य की योगी सरकार मूक बनकर सहारनपुर को जलते हुये देखकर भी चुप हैं क्योंकि हो सकता है यहां उन्हें वोटों की चिन्ता सता रही है । हालात बेकाबू होते देख डीएम ने एडीएम-प्रशासन को गोली चलाने के आदेश दिए।
डीएम से मिले निर्देश के बाद एडीएम ने पुलिस को गोली चलाने को कहा, मगर पुलिस गोली चलाने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। इतना ही नहीं, एसपी सिटी संजय सिंह ने भी गोली चलाने के आदेश दिए, मगर पुलिस ने उनकी भी नहीं सुनी।

मजफ्फरनगर की तर्ज पर सहारनपुर में भी हुआ खराब हलातों में तबादला,अगर आज यह फैसला सही है तो उस समय अखिलेश के फैसले पर विपक्ष में बैठी भाजपा ने विरोध क्यों जताया था ?

उधर, देर रात शासन ने एसपी सिटी संजय सिंह और एसपी देहात रफीक अहमद को हटा दिया है। इन्हें मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। एसपी यातायात नोएडा प्रबल प्रताप सिंह को एसपी सिटी आैर आगरा में अपर पुलिस अधीक्षक प्रोटॉकाल विद्यासागंर मिश्र को एसपी देहात बनाया गया है।