हेयर ट्रांसप्लांट कराने पर युवा की गयी जान, जाने ये है चौंकाने वाले सच

हेयर ट्रांसप्लांट कराने पर युवा की गयी जान, जाने ये है चौंकाने वाले सच
loading...

नई दिल्ली : अगर आप भी सलमान खान, सौरभ गांगुली, रणबीर सिंह या कपिल शर्मा की तरह हेयर ट्रांसप्लांट कराने की सोच रहे हैं? अगर जवाब हां है तो आपको एक बार फिर सोचने की जरूरत है। दरअसल, देश के हर छोटे-बड़े शहर में आजकल हेयर ट्रांसप्लांट सेंटर्स धड़ल्ले से खुलते जा रहे हैं। इन्हें क्लीनिक कह कर प्रचारित किया जा रहा है और लोग इनके झांसे में आ भी रहे हैं। हाल ही में चेन्नई के ऐसे ही एक सलून में एक मेडिकल छात्र की हेयर ट्रांसप्लांट के बाद मौत हो गई। दैनिक आज की इस रिपोर्ट में हर वो बात है जो हेयर ट्रांसप्लांट की सोच रहे हर व्यक्ति को जाननी चाहिए —
1) दरअसल, हेयर ट्रांसप्लांट सेंटर्स मेडिकल काउंसिल के दायरे में नहीं आते। न ही वो इन्हें लाइसेंस देती है। इसलिए इन्हें क्लीनिक नहीं कहा जा सकता।
2) एसोसिएशन ऑफ हेयर रेस्टोरेशन सर्जन्स ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी डॉ. अनिल गर्ग के मुताबिक डॉक्टर और नर्स दो-चार दिन की ट्रेनिंग लेकर हेयर क्लीनिक खोल रहे हैं।
3) जबकि ट्रांसप्लांट सिर्फ प्लास्टिक सर्जन, एएनटी सर्जन, जनरल सर्जन या डर्मोटोलॉजिस्ट से ही कराया जाना चाहिए।
कानून के अनुसार —
डॉ. गर्ग कहते हैं कि ऐसे सेंटर्स पर लगाम कसने के लिए पीएमओ से लेकर एमसीआई और हेल्थ मिनिस्ट्री तक को अप्रैल में लेटर लिख चुके हैं। लेकिन निगरानी के लिए कोई डिपार्टमेंट नहीं बन पाया है।
इस मामले में डायरेक्टर जनरल ऑ‎फ हेल्थ सर्विसेज के डॉ. जगदीश प्रसाद ने बताया कि सरोगेसी और ब्यूटी से जुड़ी गड़बड़ियों के लिए हेल्थ मनिस्ट्री ने क्लीनिकल स्टैबलिशमेंट एक्ट लागू किया है।
2013 से कानून बनने के बावजूद राज्य इसे लागू करने से कतरा रहे हैं। कानून लागू नहीं होने से इन क्लीनिक्स को न तो रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत होती है और न ही लाइसेंस की।

एक्शन ना होने की वजह —
बालों के ट्रांसप्लांट के मेडिकल की कैटेगरी में नहीं होने की वजह से ही हम डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते।
हालांकि डॉक्टर द्वारा कोताही बरतने और मरीजों को नुकसान होने की हालत पर राज्यों के मेडिकल काउंसिल से शिकायत का कानून है।
क्लीनिक होमियोपैथी चिकित्सा कारोबार के बाद हेयर ट्रांसप्लांट बिजनेस में आए डॉ. बत्रा क्लीनिक के प्रमुख डॉ. अक्षय बत्रा के मुताबिक इसमें किसी खास क्लीनिकल सर्जरी की जरूरत नहीं है।
बत्रा कहते हैं, तकनीक आसान होने के कारण इन दिनों गायनोकोलॉजिस्ट, डेंटिस्ट और आर्थोपेडिक डॉक्टर तक ऐसे क्लीनिक खोल रहे हैं।

प्रचार में किए जाते हैं झूठे दावे —
ट्रांसप्लांट तकनीक के बारे में दिल्ली में एन्हैंस क्लीनिक के प्रमुख डॉ. मनोज खन्ना का कहना है कि असल में सिर्फ फोलिकुलर यूनिट ट्रांसप्लांटेशन (एफयूटी) और फोलिकुलर यूनिट एक्सट्रैक्शन (एफयूई) थैरेपी ही हैं।
ये बाल उगाने में इस्तेमाल होती हैं। इन दोनों ही तकनीक में सर्जरी होती है। इसके बावजूद इन दिनों ज्यादातर ऐड बिना ऑपरेशन किए या फिर धब्बे रहित बाल उगाने का दावा करते हैं जो सरासर झूठे दावे हैं।
तीन तरह के केस स्टडी से समझिए किस तरह हो सकता है नुकसान —

१) केस : ट्रांसप्लांट के बाद चली गई जान !

चेन्नई में 22 साल के मेडिकल छात्र संतोष कुमार ने पिछले हफ्ते हेयर ट्रांसप्लांट कराया था।
जिस ट्रांसप्लांट सेंटर में ऑपरेशन हुआ, उसके पास हेयर सलून चलाने का लाइसेंस था।
वहां आपॅरेशन थियेटर था ही नहीं। बाद में इस सेंटर से बिना लाइसेंस के रखी दवाएं जब्त की। पुलिस ने केस दर्ज किया।

२) केस : चेहरे पर हो गया रिएक्शन !

2013 में टेलीविजन में बतौर स्क्रिप्ट राइटर काम करने वाले भरिंद्र सिंह ढिल्लो ने हेअर ट्रांसप्लांट कराया।
लेकिन चेहरे और अन्य अंगों में रिएक्शन होने लगा। इसके इलाज के लिए स्टेरॉयड तक लेना पड़ा।
मुंबई मेट्रोपोलिटन कोर्ट ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने व डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

३) केस : जितने बताए उतने बाल नहीं लगाए !

पिछले साल कोलकाता में बीएस चंद्रा से डॉक्टर ने एक हजार बालों के ट्रांसप्लांट के लिए प्रति बाल 70 रुपए की रकम तय की।
सर्जरी के बाद ऑपरेशन से पहले और बाद के फोटो देखे तो पता चला कि नहीं के बराबर ही बालों का ट्रांसप्लांट किया गया।
उपभोक्ता कोर्ट में शिकायत की है, लेकिन फैसला नहीं आया है।

loading...

loading...